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कुरुक्षेत्र: सियासत के शकुनियों के शिकार अजित सिंह, विपक्ष का एक चमकदार चेहरा बनने की संभावना से पहले ही धुंधला हो गया

Vinod Agnihotri विनोद अग्निहोत्री
Updated Thu, 06 May 2021 01:59 PM IST

सार

अजित सिंह बुनियादी तौर पर बेहद शरीफ और भले इंसान थे। राजनीति की कुटिलता और धूर्तता जिसे आमतौर पर चाणक्य नीति कह दिया जाता है, को पहचानने में उन्हें खासा वक्त लगा और जब तक वह समझ पाए काफी कुछ खो चुके थे। 
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शरद यादव और जयंत चौधरी के साथ अजीत सिंह
शरद यादव और जयंत चौधरी के साथ अजीत सिंह - फोटो : Amar Ujala (File Photo)

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विस्तार

करीब एक महीने पहले ही चौधरी अजित सिंह से फोन पर बात हुई थी और तय हुआ था कि जल्दी ही हम लोग मिलकर दोपहर का भोजन साथ करेंगे और तमाम मुद्दों पर बातचीत करेंगे। इस बातचीत में मैंने उनसे कहा कि वे अपना ख्याल रखें और अभी कुछ दिन मिलना जुलना बंद रखें। अपनी आदत के मुताबिक जोर से हंसते हुए अजित सिंह ने कहा कि भाई मैं अब उम्र के 83वें साल में हूं, इसलिए सावधानी तो बरत रहा हूं लेकिन जितने दिन भी जीना है किसानों की आवाज तो आप जैसे दोस्तों से मिलकर उठाता रहूंगा। मैंने उन्हें 28 जनवरी को आंसुओं में डूबे राकेश टिकैत का हौसला बढ़ाने के लिए साधुवाद दिया और कहा कि जल्दी ही आपको एक बार फिर बड़ी भूमिका में आना होगा। उन्होंने कहा कि मैं कहीं नहीं जा रहा हूं लेकिन अब जयंत को मैंने पूरी तरह किसानों के बीच सक्रिय होने को कह दिया है।
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