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कुरुक्षेत्र: हिमंत की ताजपोशी का फैसला क्या भाजपा में क्षत्रप युग की वापसी है, जो भविष्य में बन सकता है पार्टी के लिए सिरदर्द!

Vinod Agnihotri विनोद अग्निहोत्री
Updated Mon, 10 May 2021 01:54 PM IST

सार

भाजपा के इस फैसले ने पार्टी की व्यवहारिक राजनीति को फिर उजागर किया है। इसने साबित किया कि भाजपा का मौजूदा नेतृत्व पुरानी भाजपा की तरह नीति और विचार की जकड़न से मुक्त होकर सत्ता की राजनीति की आवश्यकताओं और दबावों के मुताबिक अपने फैसले लेता है...
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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा - फोटो : Amar Ujala

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विस्तार

असम में हिमंत बिस्वा सरमा को मुख्यमंत्री बनाकर भारतीय जनता पार्टी ने पूर्वोत्तर के इस सबसे बड़े राज्य में अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल की स्थिरता तो सुनिश्चित कर ली है लेकिन इससे यह संकेत भी गया है कि असामान्य परिस्थितियों को छोड़कर पार्टी किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री और केंद्र में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री जैसे अहम पदों पर संघ और भाजपा की मौलिक पृष्ठभूमि से आए नेताओं को ही बिठाएगी, की पुरानी नीति में अब बदलाव शुरू हो गया है। उधर कांग्रेस के पास सिर पीटने के सिवा कोई चारा नहीं है क्योंकि अगर वक्त रहते पार्टी नेतृत्व हिमंत की उपयोगिता समझी होती तो शायद 2016 में भी कांग्रेस असम में सत्ता से बाहर नहीं होती और अगर हो भी जाती तो इस बार निश्चित रूप से हिमंत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनती। लेकिन केंद्रीय नेतृत्व का अहंकार और जड़ता किस कदर पार्टी पर भारी पड़ती है उसका सबसे बड़ा उदाहरण असम में हिमंत बिस्वा सरमा की भाजपा के मुख्यमंत्री के रूप में ताजपोशी है।
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