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जब मांडू की वादियों से शेख अब्दुल्ला के सामने नेहरू जी को आवाज आई, 'कश्मीर भारत का है'

Umesh Chaturvediउमेश चतुर्वेदी Updated Mon, 21 Oct 2019 01:40 PM IST
मांडू के किले का जम्मू-कश्मीर की हालिया राजनीति से रिश्ता जुड़ा है और इसे कम ही लोग जानते हैं।
मांडू के किले का जम्मू-कश्मीर की हालिया राजनीति से रिश्ता जुड़ा है और इसे कम ही लोग जानते हैं। - फोटो : सोशल मीडिया
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अनुच्छेद 370 के कुछ प्रावधानों को हटाने और विशेष राज्य के दर्जे से वंचित होने के बाद जम्मू-कश्मीर इन दिनों पूरी दुनिया में चर्चा है। पाकिस्तान तो आए दिन इस मसले को लेकर हंगामा मचा रहा है। इसी जम्मू-कश्मीर का क्या रानी रूपमती और बाजबहादुर के प्यार के प्रतीक मांडू के किले से भी कोई संबंध हो सकता है?

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किसी के सामने यह सवाल आएगा तो सहसा वह इससे इनकार ही कर देगा। कहां कश्मीर की सुहानी वादियां और कहां इंदौर से  करीब सौ किलोमीटर दूर मांडू..जो शरद ऋतु को छोड़ दें तो पूरे साल वीरानगी सा अहसास कराता है। ऐसे में दोनों का क्या रिश्ता हो सकता है? संबंधों की बात छिड़ी है तो यह भी सवाल उठ सकता है कि क्या मांडू की रियासत से कश्मीर की रियासत के कोई तार जुड़े हुए थे। 


क्या है मांडू और कश्मीर का कनेक्शन 
ठहरिए.. मांडू के किले का जम्मू-कश्मीर की हालिया राजनीति से रिश्ता जुड़ा है और इसे कम ही लोग जानते हैं। मांडू के बारे में यह बताना पुनरावृत्ति ही होगी कि यह रानी रूपमती और बाज बहादुर के प्यार का प्रतीक है। यही वजह है कि यह किला सैलानियों का आज भी पसंदीदा है। रानी रूपमती और बाजबहादुर के प्यार को महसूस करने के लिए यहां हर साल हजारों पर्यटक आते हैं।

ऐसे ही सैलानी बनकर यहां शायद 1950 या 1951 में यहां जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्ला आए थे। तब जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री को प्रधान ही कहा जाता था। 7 अगस्त 2019 के पहले तक जम्मू-कश्मीर का अपना अलग संविधान और झंडा तक था।

जम्मू-कश्मीर के प्रधानमंत्री को मुख्यमंत्री तब कहा जाने लगा, जब 1965 के विधानसभा चुनाव में गुलाम मोहम्मद सादिक की अगुआई में कांग्रेस ने जीत हासिल की। इसके बाद राज्य के प्रधानमंत्री को मुख्यमंत्री कहा जाने लगा था। 

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