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कश्मीर और सीएए पर गलबयानी के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई से मुश्किल में पड़ा मलयेशिया

Rajesh Badalराजेश बादल Updated Thu, 16 Jan 2020 01:29 PM IST
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पीएम मोदी और महातिर मोहम्मद(File Photo)
पीएम मोदी और महातिर मोहम्मद(File Photo) - फोटो : PIB
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जिंदगी का शतक बनाने की दहलीज पर खड़े मलयेशिया के मुखिया महातिर मोहम्मद की भौंहें तनी हैं। भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए वहां से पाम ऑइल का आयात करीब करीब रोक दिया है। अब वयोवृद्ध महातिर पाकिस्तान से कश्मीर पर उसका समर्थन करने की कीमत मांग रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तान से पाम ऑइल का आयात बढ़ाने के लिए कहा है। पाकिस्तान अब सांप-छछूंदर की हालत में है। उसकी हालत पहले ही दिवालिया होने जैसी है। वह पहले से ही अनेक देशों के दर पर जाकर आर्थिक मदद के लिए झोली फैलाए हुए है। वह मलयेशिया को क्या उत्तर दे! न आयात बढ़ा सकता है और न मलयेशिया को नाराज कर सकता है।
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दरअसल, महातिर मोहम्मद ने कश्मीर और नागरिकता संशोधन कानून पर एक अनपढ़ प्रधानमंत्री की तरह व्यवहार किया है। वे कहते हैं कि भारत ने कश्मीर पर हमला कर उस पर कब्जा किया है और नागरिकता संशोधन कानून से भारत के मुसलमानों की नागरिकता छीन ली जाएगी। जाहिर है, उन्होंने बिना सचाई जाने अपनी प्रतिक्रिया दी है। अब ऐसे प्रधानमंत्री का कोई क्या करे? ख़ुद उनकी सरकार के ही जिम्मेदार पदाधिकारी और राजनेता महातिर मोहम्मद के बयानों की आलोचना कर रहे हैं। इस बहाने मलयेशिया में इस बात पर भी बहस चल पड़ी है कि क्या इस देश में आधुनिक और बौद्धिक सोच वाले नए राजनेताओं का अकाल है ?

मलयेशिया पाम ऑइल उत्पादन में विश्व में दूसरे स्थान पर है और भारत खाद्य तेल का सबसे बड़ा आयातक है। उसे हर साल 90 लाख टन पाम तेल की जरूरत होती है। वह मलयेशिया के अलावा इंडोनेशिया से भी यह तेल मंगाता है। भारत के आयात बंद करने के कारण मलयेशिया की तेल रिफायनरीज पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। पिछले साल मलयेशिया से भारत ने लगभग 40 लाख टन पाम ऑइल खरीदा था। आज यह गिरकर 10 लाख टन से भी कम होने का अनुमान है। इसकी भरपाई के लिए ही मलयेशिया की उद्योग मंत्री टेरेसा कोक ने तीन दिन पहले पाकिस्तान से प्रार्थना की थी कि वह पाम तेल का आयात बढ़ाए। 
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