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गंगा दशहरा 2019ः गंगा के अहसानों को कौन भुला सकता है

Arun TiwariTiwari Tiwari Updated Wed, 12 Jun 2019 03:41 PM IST
हरिद्वार में गंगा स्नान के लिए उमड़ी भीड़
हरिद्वार में गंगा स्नान के लिए उमड़ी भीड़ - फोटो : अमर उजाला
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ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, तिथि दशमी, हस्त नक्षत्र, दिन मंगलवार। बिंदुसर के तट पर राजा भगीरथ का तप सफल हुआ। पृथ्वी पर गंगा अवतरित हुई। ''ग अव्ययं गमयति इति गंगा'' अर्थात् जो स्वर्ग ले जाए, वह गंगा है।
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पृथ्वी पर आते ही सबको सुखी, समृद्व व शीतल कर दुखों से मुक्त करने के लिए सभी दिशाओं में विभक्त होकर सागर में जाकर पुनः जा मिलने को तत्पर एक विलक्षण अमृतप्रवाह! जो धारा अयोध्या के राजा सगर के शापित पुत्रों को पु़नर्जीवित करने राजा दिलीप के पुत्र, अंशुमान के पौत्र और श्रुत के पिता राजा भगीरथ के पीछे चली, वह भागीरथी के नाम से प्रतिष्ठित हुई। भगीरथ का संकल्प फलीभूत हुआ। कई सखियों के मिलन के बाद देवप्रयाग से नया अद्भुत नाम मिला - गंगा!

जैसी गंगा है वैसी दुनिया में कोई नदी नहीं 
इसी गंगा नाम की प्रतिष्ठा को सामने रखकर मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि जैसी मां गंगा है, वैसी दुनिया में कोई और नहीं। यह दुनिया की एकमात्र ऐसी मां है, जिसे धरा पर उतारकर एक इंसान ने स्वयं को उसकी संतान कहलाने योग्य साबित किया। भारत में भी ऐसी कोई दूसरी नदी या मां हो, तो बताइए? 
 
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