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ग्लोबल हंगर इंडेक्स में पाक से कैसे पिछड़ गया भारत? भूख-कुपोषण से लड़ने में हम क्यों नाकाम!

Ajay Khemariyaअजय खेमरिया Updated Sun, 20 Oct 2019 09:42 AM IST
ग्लोबल हंगर इंडेक्स के कुल 117 मुल्कों में से इस बार हमारा नंबर 102 रहा है। पाकिस्तान हमसे ऊपर है।
ग्लोबल हंगर इंडेक्स के कुल 117 मुल्कों में से इस बार हमारा नंबर 102 रहा है। पाकिस्तान हमसे ऊपर है। - फोटो : pixabay
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ग्लोबल हंगर इंडेक्स के कुल 117 मुल्कों में से इस बार हमारा नंबर 102 रहा है। पाकिस्तान हमसे ऊपर है। यह दो ऐसे तथ्य हैं जिन पर हमें भावनाओं से ऊपर उठकर सरकार, मीडिया और समाज की नीति, नियत को समझने का प्रयास करना ही चाहिए। दरअसल, भारत ब्रिक्स के देशों से भी मानव विकास सूचकांक में बहुत पीछे है। अब जीएचआई की जो नई रिपोर्ट आई है उसने हमारे लिए सार्क देशों से भी पिछड़ेपन की शर्मनाक इबारत लिखी है।
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बुनियादी सवाल  है कि जब हम खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हो चुके हैं। हमारे अनाज के भंडार भरे पड़े हैं तब भारत में भुखमरी की परिस्थितियां वैश्विक मूल्यांकन पर इतनी शर्मनाक कैसे है? अनाज गोदामों के भंडारण के आंकड़े और खाद्य सुरक्षा की सरकारी वचनबद्धता के बीच यह स्पष्ट हो चुका है कि हमारी सरकार अपनी वचनबद्धता में बुरी तरह से नाकाम हो चुकी हैं।

सरकार कार्यपालिका, विधायिका औऱ न्यायपालिका से मिलकर बनती है। जाहिर है यह समग्र समाज की ही विफलता है जो इस आधुनिक भारतीय समाज मे भूख की कालिख को 70 साल बाद भी अपने चेहरे से मिटा नहीं पाया है। हजारों- करोड़ रुपए हर साल खाद्य सुरक्षा से जुड़ी सामाजिक योजनाओं पर खर्च हो रहे हैं लेकिन हकीकत यह है कि समाज के वास्तविक जरूरतमंदों तक योजनाओं की पहुंच आज भी नही है।
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