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असहमति के इस दौर में हमे गांधी को याद करना चाहिए

Gautam Chaudharyगौतम चौधरी Updated Tue, 10 Dec 2019 07:34 PM IST
जब देश असहिष्णुता की दौर से गुजर रहा हो तो ऐसे समय में गांधी की प्रासंगिकता बढ़ जाती है।
जब देश असहिष्णुता की दौर से गुजर रहा हो तो ऐसे समय में गांधी की प्रासंगिकता बढ़ जाती है। - फोटो : फाइल फोटो
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जब देश असहिष्णुता की दौर से गुजर रहा हो तो ऐसे समय में गांधी की प्रासंगिकता बढ़ जाती है। आज हमारे बीच भौतिक गांधी नहीं हैं, लेकिन गांधी विचार के रूप में जीवित हैं।  एक चिंतक, विचारक, अर्थशास्त्री, समाज सुधारक, राजनेता, आन्दोलनकारी, लेखक और पत्रकार के रूप में हर जगह गांधी नए विचारों के साथ हमें दिखाई देते हैं। 
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दरअसल, गांधी के संपूर्ण व्यक्तित्व पर नजर डालते हैं तो लगता है कि गांधी व्यक्ति तो थे ही पर उनकी भौतिक काया उनके जीवन काल में ही एक विचार रूप में बदल गई थी। यही कारण है कि गोड्से की गोली ने गांधी के केवल भौतिक शरीर को नष्ट किया, उनके विचार को नहीं मार पाया। 

आधुनिक दुनिया के दो-दो सफल आन्दोलनकारी, नेल्सन मंडेला और अमेरिकी अश्वेत नेता मार्टिन लूथर, गांधी के आदर्श को अपना कर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल हुए। दुनिया के सबसे ताकतवर देश संयुक्त राज्य अमेरिका का सबसे मजबूत आदमी, वहां का राष्ट्रपति बराक ओबामा गांधी के मूल्य और आदर्श की बात करता है तो लगता है, जो लोग गांधी को ब्रितानी साम्राज्यवाद से जोड़कर देख रहे हैं वे कितने छोटे और पूर्वाग्रही हैं।
 
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