कोरोना संकट: क्या हर्ड इम्यूूनिटी की ओर बढ़ रहा है भारत?

Priyanka sourabhप्रियंका सौरभ Updated Fri, 26 Jun 2020 11:43 AM IST
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भारत में जैसे-जैसे कोरोना का प्रसार तेज हो रहा है,तो हर्ड इम्यूनिटी को लेकर चर्चा जोर पकड़ रही है।
भारत में जैसे-जैसे कोरोना का प्रसार तेज हो रहा है,तो हर्ड इम्यूनिटी को लेकर चर्चा जोर पकड़ रही है। - फोटो : amar ujala

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भारत में जैसे-जैसे कोरोना का प्रसार तेज हो रहा है,तो हर्ड इम्यूनिटी को लेकर चर्चा जोर पकड़ रही है। हर्ड इम्यूनिटी यानी अगर लगभग 70-90 फीसद लोगों में बीमारी के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाए तो बाकी भी बच जाएंगे। लेकिन इसके लिए वैक्सीन जरूरी है। क्या  कोरोना वैक्सीन की अनुपलब्धता में  हर्ड इम्युनिटी अपना काम कर पाएगी?
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कोरोना की शुरुआत में ब्रिटेन ने हर्ड इम्यूनिटी का प्रयोग करने की कोशिश की। हालांकि वहां के तीन सौ से अधिक वैज्ञानिकों ने सरकार के इस कदम का विरोध किया और कहा कि सरकार को सख्त प्रतिबंधों के बारे में सोचना चाहिए ना कि ‘हर्ड इम्यूनिटी’ जैसे विकल्प के बारे में, जिससे बहुत सारे लोगों की जान को अनावश्यक खतरा हो सकता है। मगर ब्रिटेन की सरकार ने कुछ दिनों तक अपने प्रयोग जारी रखे और वहां कोरोना ने भीषण तबाही मचाई।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक कोरोना वायरस से लोगों के बीच हर्ड इम्यूनिटी तभी ड़ेवलप होगी जब तकरीबन 60 प्रतिशत जनसंख्या संक्रमित हो चुकी हो। हालांकि इस साठ प्रतिशत के आंकड़े को लेकर भी अभी तक सभी एक्सपर्ट्स में एक राय नहीं है।
 
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