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रिकॉर्ड तोड़ती और जानलेवा होती सर्दी, क्या होगा बेघर लोगों का आसरा?

Devendra Sutharदेवेंद्र सुथार Updated Sun, 19 Jan 2020 09:24 AM IST
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पूरा देश हाड़ कंपाने वाली ठंड से ठिठुर रहा है।
पूरा देश हाड़ कंपाने वाली ठंड से ठिठुर रहा है। - फोटो : अमर उजाला
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कड़कड़ाती ठंड में ठिठुरती जिंदगी पनाह मांगती, ओढ़ा दो कंबल मिले राहत जिंदगी परवाह मांगती.। मानवीय संवेदनाओं के मूर्धन्य कथाकार प्रेमचंद की कहानी 'पूस की रात' का पात्र हल्कू भला किसे याद नहीं होगा।
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शीत ऋतु की चुभन से भरी स्याह रातों में खेत की चौकीदारी करता निर्धन कृषक हल्कू ठंड से बचने के लिए मुफ़लिसी की फटी कंबल ओढ़े कभी अलाव से अपने तन को तपाता है, कभी घुटनों को गर्दन में चिमटाता है, तो कभी चिलम के कश से अपने मन को बहलाता है। लेकिन अंततः जाड़े से जंग लेती जिंदगी में हल्कू हार जाता है।

सर्दी की सिरहन में खेत को आग की लपटों के हवाले कर देने वाले हल्कू के किरदार को आज भी आजादी के सात दशक बाद एक बड़ी निर्धन आबादी अपनी निजी जिंदगी में जीने को विवश है। 

बहरहाल, पूरा देश हाड़ कंपाने वाली ठंड से ठिठुर रहा है। सर्द हवा ने पशु-पक्षी और आम ओ खास इंसान सभी को हलकान कर रखा है। पहाड़ों पर ही नहीं, बल्कि मैदानी इलाकों में भी सर्दी का सितम जारी है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में तो कई जगहों पर पारा शून्य से नीचे पहुंच जाने के हालत बन रहे हैं।

इस बीच मैदानी इलाकों में भी इसने गोता लगाया है। भयानक सर्दी की चपेट में आने के कारण उत्तर प्रदेश में 88 व कानपुर में 19 लोगों की मौत हो गई है। पंजाब में दो, झारखंड में आठ और बिहार में भी पांच की मौत हो गई है।

उत्तर प्रदेश में शीतलहर से लोग परेशान है। शाम होते ही गलन बढ़ रही है। वहीं कानपुर देहात और गंगा किनारे के तीन शहर कानपुर, कन्नौज और उन्नाव में पारा शून्य पर लुढ़क गया है। मौसम विभाग के पास 1971 तक के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर जनवरी में इतनी ठंड कभी नहीं पड़ी।
 
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