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नागरिकता संशोधन बिल से चिंतित हैं पूर्वोत्तर के जनजातीय समूह

Ravishankar Raviरविशंकर रवि Updated Tue, 22 Oct 2019 12:44 PM IST
केंद्र सरकार ने कहा है कि नवंबर में होने वाले संसद के सत्र में नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2016 फिर से लाया जाएगा
केंद्र सरकार ने कहा है कि नवंबर में होने वाले संसद के सत्र में नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2016 फिर से लाया जाएगा - फोटो : फाइल फोटो
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नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2016 (कैब) पर पूर्वोत्तर राज्यों में संशय है। उन्हें यह भय सता रहा है कि बाहरी लोगों के बसने से वे अल्पसंख्यक हो जाएंगे, इसलिए कैब लागू करने के पहले उन्हें विश्वास में लेना जरूरी है।

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जब से केंद्र सरकार ने कहा है कि नवंबर में होने वाले संसद के सत्र में नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2016 फिर से लाया जाएगा, तब से पूर्वोत्तर राज्यों को जनजाति समूहों में बेचैनी है और उन्हें इस बात की आशंका है कि बांग्लादेश से आने वाले हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता मिलने से वे अल्पसंख्यक हो जाएंगे। उनकी भाषा, संस्कृति तथा परंपरा के साथ धार्मिक विश्वास भी प्रभावित होगा।

हालांकि यह संशोधन विधेयक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न की वजह से आने वाले हिंदू, सिख, ईसाई , बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों के लोगों पर लागू होगा। लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों को परेशानी बांग्लादेश से आने हिंदू शरणार्थियों को लेकर है। उनकी बड़ी संख्या असम और त्रिपुरा में बसी हुई है। प्रस्तावित विधेयक नागरिकता कानून, 1955 में सेशोधन के लिए लाया गया है।
 

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