पक्षियों की दुनिया और मेरी बालकनी, एक संसार जो मोहक है..! 

Ritesh R.Jaiswal  Published by: रितेश.आर. जायसवाल
Updated Fri, 04 Dec 2020 10:14 AM IST
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मेरे बचपन में आसपास पक्षियों का सुंदर संसार था।
मेरे बचपन में आसपास पक्षियों का सुंदर संसार था। - फोटो : फोटो: रितेश जायसवाल

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मुझे याद है कि बचपन में ग्रामीण क्षेत्र के अपने पुश्तैनी मकान के इर्द-गिर्द न जाने मैंने कितने पशु-पक्षी देखें होंगे। लेकिन दिन ब दिन बढ़ते शहरीकरण और प्रदूषण के कारण कई पक्षी पलायन करते जा रहे हैं और कुछ तो विलुप्त होने के कगार पर हैंं। क़स्बों और शहरों के बालकनी से गौरैया का ग़ायब होना तीव्र शहरीकरण का कुप्रभाव ही तो है।  

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ख़ैर, बचपन का प्रकृति-प्रेम मेरे अंदर आज भी ज़िंदा है और आधुनिक शहरी जीवन में यह प्रेम ’बर्ड वॉचिंग और वाइल्डलाइफ़ फ़ोटोग्राफ़ी’ का रूप ले चुका है। चूंंकि काँक्रीट के जंगल में इस शौक़ को पूरा करना मुमकिन नहीं है, इसलिए मैं फ़ुरसत निकाल कर दिल्ली के आसपास के खेत-खलिहान, झील-तालाब, पार्क, जंगल, आदि के चक्कर लगाता रहता हूंं।  

इसी साल मार्च में, कोविड-19 नामक एक बला ने, हमसब के सामान्य जीवन को पटरी से उतार कर एक किनारे रख दिया। हम लोग एक वैश्विक लॉकडाउन में अपने अपने घरों में बंद हो गए, साथ ही सब कुछ बंद हो गया। मुझे और मेरे दोस्तों को इस बात बहुत निराशा हुई क्योंकि काम-काज के साथ साथ बर्ड-वॉचिंग की सारी योजनाएंं विफल हो गई। अब घर की बालकनी ही एक ऐसी जगह बची थी जहांं से बाहरी दुनिया को निहारा जा सकता था।  

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