कोरोना संकट और लॉकडाउन: पक्षियों की रोचक दुनिया का अनूठा जीवन

Vikram Singh Published by: विक्रम सिंह
Updated Mon, 12 Oct 2020 12:17 PM IST
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कौआ बाकी चिड़ियों के अंडे या उड़ ना पाने वाले चूजों का शिकार करने में माहिर होता है
कौआ बाकी चिड़ियों के अंडे या उड़ ना पाने वाले चूजों का शिकार करने में माहिर होता है - फोटो : विक्रम सिंह

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पहाड़ों में रहने वाले हर इंसान को गर्मियों के मौसम का उतना ही इंतजार होता है, जितना मैदानों में रहने वाले लोगों को गरम दिनों के बाद आने वाली बारिश का। मेरा काम कुदरत में पाए जाने वाले जीव-जंतुओं के बारे में खोज-बीन करना, उनकी तस्वीरें लेना और जंगल में मरी हुई चीजें जैसे कीड़े-मकोड़े, हड्डियों, कंकालों, चिड़ियों और मधुमखियों के घरों आदि को इकट्ठा करने का है। हिमाचल के ठंड के मौसम के बाद, हर साल की तरहां इस साल भी मुझे गर्मियों का इंतजार था।

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इस साल की शुरुआत तो बाकी बीते हुए सालों की तरह ही हुई थी। नए साल की मंगल कामना से भरे हुए संदेश, फोन पे दोस्तों, रिश्तेदारों को बधाइयां देना-लेना वगैरह-वगैरह। लेकिन मार्च का महीना हमारी प्रजाति के सभी लोगों के लिए कुछ अजीब सी शुरुआत ले के आया। हम में से किसी को ये एहसास तक भी नहीं था के हम अपनी पूरी गर्मियां घर में ही बिताने वाले हैं।


मैंने अपने घर में कैद, अपने कमरे की खिड़की से बहार होने वाली हरकतों को देखते हुए अपना ज्यादातर समय काटा। इंसानों को छोड़ के, लगभग सभी जीव मजे में थे। जो कुत्ते कभी सड़कों पे चलती हुई फर्राटेदार गाड़ियों से डर के कोने में दुबके रहते थे, उन्हीं सड़कों पे अपने पूरे शरीर को फैला के सोते हुए दिखे। ऐसा ही कुछ, दुनिया के बहुत अलग-अलग जगह पे भी हुआ जहां जंगली जानवर पुरे ठाट-बाठ से सड़कों पे घूमते हुए दिखे।

आप सभी की तरहां मैंने भी इन गर्मियों में करने के लिए बहुत से काम सोच रखे थे। इस साल की सूची में सबसे ऊपर मैंने सोचा था के अपने गांव में खिलने वाले जंगली फूलों (जो की हर साल बस एक ही बार खिलते है) की तस्वीरें लूंगा और साथ में उनको सूखा के हरबेरियम (सूखी वनस्पतियों का संग्राह) भी बनाऊंगा। हिंदुस्तान में पेड-पौधों की लगभग 47000 प्रजातियां हैं, इनमें से 3256 प्रजातियां हिमाचल प्रदेश में पाई जाती हैं। मेरा ये काम अब अगले साल ही संभव हो पाएगा, शायद।

पहाड़ों में गर्मियों का मौसम वैसे तो कुछ ही महीनों (अप्रैल से जून तक) के लिए आता है, लेकिन इन्हीं तीन महीनो में भिन-भिन प्रकार के जीवन देखने को मिलते है। यलो हिमालयन रास्पबेरी, जिसे लोकल भाषा में आंंखे कहा जाता है, केवल इसी दौरान ही जंगल में फल देती है।


शहतूत के पेडों पर फल, बुरांश के पेड़ो पर फूल और जमीन पे उगने वाली एक बहुत ही दुर्लभ मशरूम जिसे गुच्छी कहते हैंं, इसी दौरान निकलते हैंं।

पेड़ों और छोटे पौधों के नए पत्तों पे तितलियां-पतंगे अंडे देती है और इन में से निकलने वाली ढेरों इल्लीया इन्हींं पत्तों को खाती है। हिमाचल में तितलियों की लगभग 107 प्रजातियां हैं। मैं, अभी तक बहुत ही कम तितलियों को देख पाया हूं क्यूंकि ये बहुत ही तेजी से इधर से उधर उड़ जाती है। लेकिन इनकी इल्लियों को हरे पत्ते खाता देखना मुझे बहुत ही ज्यादा पसंद है। कभी-कभी तो मैं आधा दिन इनकी तस्वीरों और वीडियो लेने में ही निकल देता हूं। लेकिन इन इल्लियों को मुझसे भी ज्यादा ध्यान से बहुत से पंछी देखते हैं।

काले रंग की एक चिड़िया जिसको भुजंगा (ड्रोंगो) के नाम से जाना जाता है, तितलियों को पकड़ने में माहिर होती है। इन्हीं मौसम में यह चिड़िया कौओं को भगाती हुई भी नजर आ जाती है, क्यूंकि ये मौसम इनके बच्चे देने का होता है।

कौआ बाकी चिड़ियों के अंडे या उड़ ना पाने वाले चूजों का शिकार करने में माहिर होता है। वह बहुत चालाकी से अपनी नजरें घोसलों पे रखता है, और जब चिड़िया खाना लेने के लिए घोसलों से दूर जाती है तो ये महाशय मोके पे चौका मारने आ पहुंचता है।

लेकिन सफलता बहुत ही मुश्किल से मिल पाती है। इसके बहुत से कारण हो सकते है। चिड़िया वैसे तो एक दूसरे से दूरी पे ही घर बनती है लेकिन इतना भी दूर नहीं, तो जब ये मौका परस्त कौआ किसी एक घोसले की तरफ जाता है तो आसपास वाली चिड़िया भी चौकन्नी हो जाती है और कौए को भगाने में एकजुट हो जाती हैं।

हाल ही में मेरे घर की दीवार पर टंगे हुए लकड़ी के एक घर को (जो की चिड़ियों के लिए ही बनवाया था मेरे पिताजी ने) मैना चिड़िया के एक जोड़े ने अपने पांच बच्चों को पालने के लिए चुना।

पहले तो इनकी तरफ इतना ध्यान नहीं गया क्यूंकि उनकी चूं-चूं की आवाज इतनी ज्यादा नहीं आया करती थी। लेकिन जब वो कुछ बड़े हुए तो मेरा ध्यान उनके घर की तरफ गया, साथ में उनके मां-बाप का ध्यान भी मेरी तरफ ज्यादा हो गया।

जब-जब में उनके घर के नीचे से गुजरता था वो दूर से ही के-के-के की आवाज निकालने लग पड़ते थे, कई बार तो वो मेरे सर के ऊपर से बहुत ही नजदीक से उड़े। लेकिन धीरे धीरे मैंने उनके पुरे परिवार के रहने के तरीके को समझ लिया। रात को उनके घर के नजदीक जाने को मनाही हो गई थी।

 
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कई बार लगता है के मानो ये किसी खुफिया अभियान का हिस्सा हों...

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