खत्म हुआ एनडीटीएफ का वनवास : 24 साल बाद डूटा में लहराया भगवा, कार्यकारिणी परिणाम भी घोषित

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 28 Nov 2021 05:49 AM IST

सार

दक्षिणपंथी संगठन एनडीटीएफ के डॉ ए.के भागी ने डूटा अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया। छठी बार डूटा अध्यक्ष बनने का डीटीएफ का सपना टूटा, भगवा पड़ा भारी। 
जीत के बाद डॉ. भागी...
जीत के बाद डॉ. भागी... - फोटो : amar ujala
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विस्तार

दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ चुनाव में दक्षिणपंथी संगठन(नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट) ने अपने 24 साल के वनवास को खत्म करते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। एनडीटीएफ के डॉ एके भागी डूटा के 17वें अध्यक्ष बने हैं। इसी के साथ ही डूटा में भगवा लहरा गया है। इससे पहले वर्ष 1997-1999 में एनडीटीएफ के डॉ श्रीराम ओबराय डूटा के अध्यक्ष बने थे। इस तरह से आरएसएस समर्थित एनडीटीएफ ने डूटा अध्यक्ष बनने के वामपंथी शिक्षक संगठन(डीटीएफ) के सपने को तोड़ दिया है। लगातार पांच बार अध्यक्ष बनने का रिकॉर्ड डीटीएफ के नाम है। डूटा के इतिहास में यह रिकॉर्ड अब तक किसी के नाम नहीं है। 
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डूटा चुनाव के लिए शुक्रवार को मतदान समाप्त होने केबाद देर शाम मतगणना शुरू की गई। शनिवार तड़के चार बजे घोषित नतीजों में भाजपा समर्थित एनडीटीएफ के उम्मीदवार डॉ एके भागी अध्यक्ष चुन लिए गए। शुक्रवार तड़के आए चुनाव नतीजों में नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट(एनडीटीएफ) के दयाल सिंह कॉलेज में केमिस्ट्री के प्रोफेसर ए.के भागी ने वामपंथी समर्थक डीटीएफ की डॉ आभा देव को 1382 मतों केअंतर से हरा दिया। वर्ष 2019 में हुए चुनाव में डीटीएफ और एनडीटीएफ के बीच कांटे की टक्कर थी।इस चुनाव में डीटीए के डॉ राजीव रे ने डॉ भागी को 269 मतों से हराया था। चुनाव में कुल 9446 वोट थे, जिसमें से 7194 वोट पड़े। डॉ भागी को 3584 और डॉ आभा को 2202 मत मिले। इस चुनाव में कांग्रेस समर्थित शिक्षक संगठन डॉ प्रेमचंद को 832 मत व निर्दलीय शबाना आजमी को 263 मत प्राप्त हुए। वहीं इस चुनाव में 313 अवैध वोट पड़े। अभी तक अवैध वोट पडने का रिकॉर्ड 535 वोट का है।   


डॉ भागी पहले डीयू एक्जिक्यूटिव काउंसिल केसदस्य भी रह चुके हैं। डीयू शिक्षक संघ में 2019 में डॉ राजीब रे अध्यक्ष बने थे। उनसे पहले डीटीएफ की ही डॉ नंदिता नारायण, वर्ष 2013, वर्ष 2015 में अध्यक्ष बनी थी। वर्ष 2011 में डीटीएफ के ही डॉ अमरदेव अध्यक्ष बने थे। जबकि 2017 में भी डॉ राजीब रे अध्यक्ष बने थे। डूटा चुनाव इस बार त्रिकोणीय नहीं था। अध्यक्ष पद के लिए चार उम्मीदवार मैदान में होने के बाद भी कांटे का मुकाबला एनडीटीएफ और डीटीएफ केबीच ही था। चुनावों से पहले यह कयास लगाए जा रहे थे कि इस बार एनडीटीएफ का पलड़ा भारी है। और डॉ ए.केभागी चुनाव जीत सकते हैं।    

हमारा मुख्य फोकस तदर्थ शिक्षकों का नियमितीकरण कराना रहेगा।
दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ केनए अध्यक्ष डॉ एके भागी ने कहा कि शिक्षक समुदाय ने हम पर भरोसा जताया है। इस ऐतिहासिक जीत के लिए एनडीटीएफ अत्यंत आभारी है। एनडीटीएफ का प्रयास रहेगा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में वर्षों से लंबित पड़ी शिक्षकों की समस्याओं को हल करने का माध्यम डूटा बने। उन्होंने कहा कि डूटा संघर्ष केसाथ डीयू के अकादमिक और शोध केरसिस्टम में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। डूटा का मुख्य फोकस हजारों की संख्या में कार्यरथ तदर्थ शिक्षकों का वैधानिक प्रक्रिया केतहत नियमितीकरण कराना है। दिल्ली सरकार की द्वारा संचालित कॉलेजों के शिक्षकों को वेतन, प्रोफेसर स्तर तक सभी का कॉलेजों में प्रमोशन, शिक्षकों के हितों को हल कराना भी प्राथमिकता में रहेगा। हमारा प्रयास रहेगा कि संगठित होकर समस्याओं का समाधान करने वाले संगठन के रुप डूटा की पहचान बने।  

डूटा कार्यकारिणी परिणाम भी घोषित
दिल्ली विश्वविद्यालय में शुक्रवार को हुए दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) चुनाव में 15 सदस्यीय डूटा कार्यकारिणी के चुनाव परिणाम भी शनिवार को घोषित कर दिए गए। डूटा के लिए 15 सदस्यीय कार्यकारिणी में एनडीटीएफ केपांचों उम्मीदवार कमलेश कुमार रघुवंशी, लोके कुमारी खन्ना, महेंद्र मीणा, चमन सिंह ने चुनाव जीत लिया है। वहीं डीटीएफ के चार उम्मीदवार रुदाशीष चक्रवर्ती, जितेंद्र कुमार मीणा, वीएस दीक्षित, व नंदिता नारायण भी जीत गई हैं। वहीं एएडी के दो उम्मीदवार आनंद प्रकाश व अंजू जैन ही नतीजों में सफलता प्राप्त कर सके हैं। वहीं इंटेक के प्रदीप कुमार इंटेक आई के उदयबीर सिंह, और स्वतंत्र उम्मीदवार श्याम कुमार डूटा कार्यकारिणी में पहुंच गए हैं। एनडीटीएफ के कमशेल कुमार मीणा को सर्वाधिक 8793 वोट मिले हैं। दूसरे स्थान पर डीटीएफ की नंदिता नारायण को 7357 मत मिले हैं। 

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