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आयुर्वेद करेगा पशुओं को निरोग

अमर उजाला ब्यूरो मथुरा Updated Tue, 23 May 2017 11:58 PM IST
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वेटरनेरी विवि में हो रहा शोध, शुरू की गई औषधीय पौधों की खेती
वेटरनेरी विवि में हो रहा शोध, शुरू की गई औषधीय पौधों की खेती - फोटो : amar ujala

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वेटरनेरी विश्वविद्यालय में पशुओं का आयुर्वेदिक पद्धति से भी उपचार किया जाएगा। इसके लिए वृहद योजना बनाई गई है। विश्वविद्यालय औषधीय पौधों की अपनी भूमि पर ही खेती कर रहा है। इन औषधीय पौधों से पशुओं की बीमारियों के लिए दवाएं बनाई जाएंगी।
वेटरनेरी विश्वविद्यालय की औषधीय वाटिका मेें शतावर, ग्वारपाठा, श्यामा, रामा तुलसी, कपूर तुलसी, अश्वगंधा, ब्रह्मी, सदाबहार, नागरमौंथा, नीम, गिलोय, अमरबेल, सहजना, बच्छ, अर्जुन, लेमन ग्रास, आंवला, अदरक, पोदीना, मीठा नीम, जामुन, बेर सहित अन्य औषधीय पौधे लगाए गए हैं। चारागाह व औषधीय वाटिका प्रभारी डा. ब्रजेश उपाध्याय ने बताया कि विश्वविद्यालय के डेयरी फार्म के 700 पशुओं के  बीमार होने पर आयुर्वेदिक तरीके से इलाज करने का काम शुरू किया है। बीमार पशुओं को औषधीय पौधों का अर्क, छाल और पत्ते कूट पीस कर खिलाने पर पशु ठीक किए जा रहे हैं। इस संबंध में शोध भी किया जा रहा है। विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. केएमएल पाठक ने बताया कि आगामी दिनों में विश्वविद्यालय किसानों को औषधीय खेती करने का प्रशिक्षण देगा। किसानों को आयुर्वेदिक कंपनियों से उत्पाद खरीदने को अनुबंध कराया जाएगा।

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