केवल सलाह पर खर्च होंगे 52 लाख!

चंडीगढ़/ब्यूरो Updated Thu, 25 Oct 2012 12:02 PM IST
only advice will cost 52 million
शहर के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को मजबूत बनाने के लिए नगर निगम ने 52 लाख रुपये सलाह पर खर्च करने का प्रस्ताव तैयार किया है। यह राशि नागपुर स्थित नीरी (नेशनल इंवायरन्मेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट) को देने का प्रस्ताव है। अतिरिक्त कमिश्नर सुनील भाटिया की ओर से यह प्रस्ताव तैयार कर 26 अक्तूबर को होने वाली सदन की बैठक में चर्चा के लिए लाया जा रहा है। हाल ही में मेयर, कमिश्नर, अतिरिक्त कमिश्नर, मनोनीत पार्षद सुरेंद्र बग्गा और भाजपा पार्षद देवेश मोदगिल नागपुर में सेमिनार में शामिल होकर लौटे हैं। इसी टूर को लेकर नाराज कांग्रेस पार्षदों ने मेयर के खिलाफ मोर्चा खोला है। यह सेमिनार सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट विषय पर था।

टूर से वापस आने के बाद ही यह प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार रिपोर्ट तैयार करने के लिए 52 लाख 20 हजार रुपये की राशि तय हुई है, जबकि दूसरे फेज के लिए 6 लाख रुपये इंस्टीट्यूट को दिए जाएंगे। दूसरे फेज के तहत यह शर्त शामिल है कि रिपोर्ट देने के बाद जो प्रोजेक्ट लागू किया जाएगा, उसको लेने वाली कंपनियों के दस्तावेजों और उनकी क्षमता को इंस्टीट्यूट ही चेक करेगा।

लैंड फिलिंग एरिया भी होगा मजबूत
अधिकारियों का मानना है कि इस सलाह से डंपिंग ग्राउंड के लैंड फिलिंग एरिया को भी मजबूत किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट से कम से कम जगह का इस्तेमाल कर ज्यादा से ज्यादा कूड़ा डंप किया जा सकेगा। इस समय नगर निगम के पास डड्डूमाजरा में 20 एकड़ जमीन लैंड फिलिंग के लिए बची है।

खुद ही आए थे इंस्टीट्यूट के अधिकारी
इस साल जून में इंस्टीट्यूट के अधिकारी खुद ही नगर निगम प्रशासन के पास आए थे और उन्होंने निगम अधिकारियों को कहा था कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए वह सलाह दे सकते हैं। इंस्टीट्यूट की ओर से सलाह देने के लिए पहले 89 लाख रुपये मांगे गए थे। उसके बाद 52 लाख 20 हजार रुपये में सौदा तय किया गया, लेकिन इसमें मैपिंग का काम नगर निगम खुद करेगा।

सेक्टर-22 का प्रोजेक्ट हो चुका है फ्लॉप
कूड़ा उठाने वाले कर्मचारियों के विरोध के कारण सेक्टर-22 का पायलट प्रोजेक्ट फ्लॉप हो चुका है। ऐसे में पार्षदों का कहना है कि नई सलाहकार कंपनी की ओर से अगर डोर टू डोर कूड़ा उठाने की फिर से सलाह दी जाती है तो क्या होगा।

समस्याओं का जिक्र नहीं
एजेंडे में शामिल जो प्रस्ताव तैयार किया गया है, उसमें इस बात का जिक्र नहीं है कि इस समय गारबेज से संबंधित किन-किन समस्याओं से शहरवासी जूझ रहे हैं। वहीं मैनेजमेंट मजबूत करने के बाद क्या क्या फायदे होंगे।

2008 में भी ली गई थी सलाह
पूर्व मेयर प्रदीप छाबड़ा का कहना है कि साल 2008 में भी लैंड फिलिंग एरिया के लिए एक कंपनी से सलाह ली गई थी। डिप्टी मेयर सतीश कैंथ का कहना है कि उन्होंने प्रस्ताव का अध्ययन किया है। उनका कहना है कि किसी विशेष संस्था और कंपनी से ही सलाह लेने का प्रस्ताव चर्चा के लिए आया है। अगर सलाह लेनी है तो कई कंपनियों से संपर्क किया जाना चाहिए।

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