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कुपोषण मुक्त गांव की मंशा पर हड़ताल ने फेरा पानी

lalitpur Updated Fri, 08 Dec 2017 01:39 AM IST
प्रशासन
प्रशासन - फोटो : demo pic
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ललितपुर। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल ने कुपोषण मुक्त गांव की मंशा पर पानी फेर दिया है। हड़ताल की वजह से आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार का वितरण नहीं हो पा रहा है। वहीं, कुपोषित बच्चों की देेखरेख भी नहीं हो पा रही है। इन हालात में अति कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आ रही है।
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देश को आजादी तो मिल गई, लेकिन अभी कुपोषण से छुटकारा मिलना बाकी है। अकेले ललितपुर जिले में ही 50 हजार से अधिक नौनिहाल कुपोषण से ग्रसित हैं। इनमें करीब दस हजार बच्चों को गंभीर कुपोषण है। शासन ऐसे बच्चों को पौष्टिक आहार मुहैया कराता है। इसके लिए जिले में 1124 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं तैनात हैं, जो वर्तमान में विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। इसके कारण आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन बुरी तरह गड़बड़ा गया है, न तो केंद्रों पर पौष्टिक आहार का वितरण हो रहा है और न ही टीकाकरण के कार्यक्रम संचालित हो पा रहे हैं। इस हड़ताल का सबसे ज्यादा विपरीत असर कुपोषण मुक्त गांव की संकल्पना पर पड़ा है। डीएम मानवेंद्र सिंह ने इस बीमारी को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए एक अधिकारी को दो गांव की जिम्मेदारी दी है। इस तरह जिले के 50 गांवों में नामित अधिकारियों को केंद्रों के संचालन पर नजर रखना है। लेकिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल समाप्त होने की जगह लंबी खिंच रही है। इस कारण गांवों के नियमित निरीक्षण नहीं हो पा रहे हैं। विभागीय अधिकारी से लेकर प्रशासनिक अधिकारी भी आंगनबाड़ियों की हड़ताल समाप्त होने के इंतजार में बैठे हैं। कुछेक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर लापरवाही बरतने के मामले में कार्रवाई हुई है। इससे अन्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। वहीं, आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन की वास्तविकता भी सामने नहीं आ पा रही है। उधर, महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की जिलाध्यक्ष प्रतिभा कौशिक ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने उनकी हड़ताल को कमजोर करने के मकसद से विभिन्न केंद्रों के बाहर पौष्टिक आहार की बोरियां डलवाई जा रही हैं। यही नहीं, आंगनबाड़ी कर्मचारियों पर काम करने का दबाव बनाया जा रहा है।

भगवान भरोसे छोड़ दिए कुपोषित बच्चे
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल को सैंतालिस दिन हो गए हैं, तब से लेकर अब तक अधिकारी इसका विकल्प नहीं तलाश सके हैं। ऐसे में जिले के करीब 50 हजार बच्चों को कुपोषण से स्वयं लड़ना पड़ रहा है। इस स्थिति में कुपोषित बच्चों की सेहत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

पोषाहार वितरण की तलब की गई रिपोर्ट
हड़ताल के दौरान संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन और पोषाहार वितरण की रिपोर्ट सीडीपीओ स़े तलब की गई है। केंद्रों में नामांकित बच्चों को हर हाल में पोषाहार का वितरण कराया जाएगा।
देवेंद्र प्रताप, जिला विकास अधिकारी

फोटो 4
कैप्सन-विकास भवन के बाहर प्रदर्शन करती आंगनबाड़ी कार्यकर्ता।

मिशन इंद्रधनुष का भी किया जाएगा बहिष्कार
ललितपुर। महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ ने वजन दिवस के बाद अब मिशन इंद्रधनुष का भी बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। विकास भवन के बाहर सैंतालिसवें दिन धरना पर बैठी जिलाध्यक्ष प्रतिभा कौशिक ने कहा कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं हो जाती हैं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान कोई भी आंगनबाड़ी कर्मचारी टीकाकरण कार्यक्रम का काम नहीं करेगी। इस कार्यक्रम की शुरुआत आज से हो गई है। इस मौके पर अर्चना रावत, अरुण राजा, मालती सिंह, किरन राजपूत, सुमन निरंजन, सुनीता टोंटे, ललितेंद्र बबेले, आभा शर्मा, अनीता, रामदेवी लोधी, सुखवती बबेले, संध्या जैन, उर्मिला, रामप्यारी, पूनम जैन उपस्थित रहीं।

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