21 साल में शहीद हो गया था सिहोर का अशोक 

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2020 05:23 PM IST
कारगिल के शहीद अशोक की प्रतिमा के साथ परिजन
कारगिल के शहीद अशोक की प्रतिमा के साथ परिजन - फोटो : AMAR UJALA
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सिहोर गांव में शहीद अशोक कुमार यादव के पिता अपने बेटे की बहादुरी का किस्सा बड़े गर्व के साथ सुनाते हैं। खुद भी सेना में रहे बलबीर सिंह भले ही बुजुर्ग हों लेकिन उनका हौंसला पूरी तरह से जवां दिखा। उन्होंने कहा कि बेटे की याद तो आती है । बेटे ने जो काम किया उस पर हमें गर्व रहेगा। सिहोर गांव का अशोक भर्ती होने के बाद पहली बार जम्मू- कश्मीर में गया था। उनके पिता बलबीर सिंह ने अमर उजाला टीम से बातचीत करते हुए बताया कि उनके दो बेटे थे। उन्होंने बताया कि वह दो बार सेना में रहे हैं। उन्होंने 11 कुुमांऊ रैजीमेंट में नौकरी कर देश की सेवा की थी।जिसकी पेंशन उनको मिलती है। बड़े बेटे अशोक को सेना में भर्ती कराया था। अशोक भी 13 कमाऊं रैजीमेंट में भर्ती हुए। एक साल पांच महीने के अल्पकाल में ही उनकी ड्यूटी जम्मू कश्मीर में आई थी। रानी खेत में ट्रेनिंग के बाद सीधा जेएंडके भेजे गए थे। शहीद अशोक कुुमार को सैन्य सेवा मेडल भी मिला है। अशोक के छोटे भाई राजीबर सिंह ने बताया कि 21 साल की उम्र में ही उनका भाई शहीद हो गया। परिवार के लोग उनके रिश्ते की बात चला रहे थे। इसी अशोक बीच शहादत देकर चला गया। पिता बलबीर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि अशोक कुमार का जन्म 1 नवंबर 1977 को हुआ था। अशोक कुमार को खेलना बहुत पसंद था। मौका मिलते ही गांव के खेल ग्राउंड में फुटबॉल खेलने चला जाता था। जब मैं छुट्टी आता था तब सबसे ज्यादा समय अशोक मेरे साथ व्यतीत करता था। छुट्टी आने के बाद गांव में बाबा ब्रह्मचारी के मंदिर में माथा टेकने के लिए जाता था। ट्रेनिंग खत्म होने के बाद अशोक कुमार की ड्यूटी विश्व का सबसे ऊंचा युद्ध स्थल सियाचिन ग्लेशियर में लग गई थी। सियाचिन ग्लेशियर से जब बटालियन नीचे उतरी उसके बाद उसको सीधे कारगिल की लड़ाई में भेज दिया गया था। अशोक कुमार अपने परिवार जन को खत लिखा करता था। जिसमें वह अपने छोटे भाई राजवीर सिंह को हमेशा कहता था कि खुद पढ़ाई में ध्यान रखो। बहनों का पढ़ाई की तरफ ध्यान दिलाओ। अशोक कुमार की रेजीमेंट ने 5685 पॉइंट पर तुरतूक पहाड़ी पर दुश्मनों को मार कर कब्जे में लिया था। अशोक कुमार के पार्थिव शरीर को गांव लाया गया था और दाह संस्कार के लिए श्मशान घाट ले जाया गया तब इंद्रदेव ने भी 1 मिनट के लिए वर्षा करके शहीद अशोक कुमार को नमन किया था। शहीद अशोक कुमार को मरणोपरांत सैन्य सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था। शहीद अशोक कुमार का नाम राष्ट्रीय स्मारक राजपथ नई दिल्ली में वाल नंबर 2 सी रॉ नंबर 6 पर कॉलम नंबर 1530 पर में वार आप्रेशन विजय प्राप्त करने पर नाम दर्ज हैं। शहीद अशोक कुमार की मां जब किसी जवान को छुट्टी आता देखती है तो उसको अशोक के नाम से बुलाती है। बूढ़ी मां के आंखों से अश्रु धारा बहने लग जाती है। शहीद अशोक कुमार के भाई राजवीर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि परिवार को सरकार की तरफ से एक गैस एजेंसी मिली हुई हैं। राज्य सरकार और केंद्र सरकार की तरफ से आर्थिक सहायता भी प्राप्त हुई थी। राज्य सरकार की तरफ से राजवीर सिंह को लेबर डिपार्टमेंट में नौकरी मिली हुई हैं। शहीद अशोक कुमार मेमोरियल क्लब के नाम से गांव में एक क्लब बनाया हुआ हैं। बाबा ब्रह्मचारी के मेले पर इस क्लब के माध्यम से एक खेल प्रतियोगिता का आयोजन करवाया जाता हैं। समय-समय पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाता हैं। 4 सितंबर को पुण्यतिथि मनाई जाती है जिसमें हवन यज्ञ किया जाता हैं। गांव के चारों तरफ शहीद अशोक कुमार के नाम से सड़क बनी हुई है। शहीद के नाम से गांव के स्कूल का नाम अशोक कुमार राजकीय उच्च विद्यालय हैं।
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