भुगतान लेना है तो आयकर में दर्ज कराएं आधार

बरेली Updated Thu, 29 Dec 2016 01:38 AM IST
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आयकर विभाग से रिटर्न के आधार पर टीडीएस का भुगतान लेने वालों को आधार नंबर दर्ज कराना होगा। उन्हें यह नंबर बैंक खाता और आयकर कार्यालय में पेश किए जाने वाले रिर्टन में भी अंकित करना होगा। उसी के बाद उनको रिफंड किया जा सकेगा। दोनों के प्रोफार्मा में यह कालम पहले से ही था लेकिन अब उसे अनिवार्य कर दिया गया है। इस सिस्टम के लागू होने के बाद फर्जीवाड़ा की आशंका बहुत कम होगी।
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आयकर में जमा अधिक टीडीएस का भुगतान लेने वाले सक्रिय है। वह फर्जी पतों पर दूसरे नाम से खाता खोलकर टीडीएस लेने के प्रयास में है। ऐसा ही मामला लखनऊ सहित कई शहरों में खुला है। उसी के बाद निर्देश जारी किए हैं। पिछले महीने नौ नवंबर से नोटबंदी के बाद नए खाते खोलकर उनमें धनराशि जमा की गई है। इन खातों में भी गड़बड़ी की आशंका व्यक्त की जा रही है। इसलिए ऐसे खातों का चिन्हांकन किया जा रहा है।

आशंका है कि बड़े कारोबारियों ने अपने कर्मचारियों और विश्वास पात्रों के  खाते खुलवाकर उनमें पुराने नोट जमा कराए गए हैं। अब उन रुपयों को निकाल रहे हैं, जबकि वास्तविक खातेदारों को पता ही नहीं हैं कि उनके खातों में कितने पुराने नोट जमा कराए गए और उनमें से कब-कब कितनी कितनी धनराशि निकाली जा रही है।

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