पर्यावरण के प्रहरी: सात लाख पौधों से शहर को हरा करने का जुनून

ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Sun, 04 Jun 2017 05:36 PM IST
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कंक्रीट जंगल में तब्दील हो रही औद्योगिक नगरी की हरियाली बचाने वालों में सेक्टर 15 निवासी बांगा दंपति प्रमुख हैं। चार साल पहले घर के आस पास उजाड़ पड़ी ग्र्रीन बेल्ट को हरा- भरा करने से शुरू हुआ सफर अब तक आठ हजार से अधिक पौधरोपण तक पहुंच चुका हैं। दंपति का पर्यावरण के प्रति यह जुनून ही है कि हर दिन कहीं न कहीं पौधरोपण होता है। सिर्फ पौधरोपण ही नहीं उस पौधे को बड़ा करने की जिम्मेदारी भी बाखूबी निभाई जाती है। 
सेक्टर 15 में प्रवेश करते ही आपको ठंडक और चारों ओर हरियाली महसूस होगी। इसके पीछे मकान नंबर 1167 में रहने वाले एसएस बांगा और मीनू बांगा दंपति हैं। बांगा दंपति ने बताया कि चार साल पहले सेक्टर की आधा किलोमीटर से अधिक ग्रीन बेल्ट बंजर धरती की तरह थी, कूड़ा-करकट की वजह से घास तक नहीं उगती थी। वर्तमान में आधा किलोमीटर से अधिक ग्रीन बेल्ट  हरियाली से भरपूर हैं। ग्रीन बेल्ट में मौसमी फूलों के पौधे हैं तो आम, जामुन, बेर जैसे बहुवर्षीय फल-छाया वाले पेड़ भी हैं। सेक्टर-15 की यह ग्रीन बेल्ट सुबह शाम टहलने वालों की पसंदीदा जगह बन चुकी है। 

पेशे से उद्यमी बांगा कहते हैं कि पेड़ पौधे न सिर्फ धरती का श्रंगार हैं बल्कि मानव जाति के लिए प्राणवायु देने वाला भंडार। जिस तरह औद्योगिक नगरी का पर्यावरण दूषित हो रहा है जरूरी है कि पेड़ पौधे लगाकर उसे संरक्षित किया जाए। मीनू बांगा कहती हैं कि हर मां की इच्छा होती है कि वह अपने बच्चों के लिए संपति और सुविधाएं इकट्ठा करे, आज के युग में हरियाली भी बड़ी संपति है पेड़ पौधे लगाकर हम आने वाली पीढिय़ों को शुद्ध और  स्वच्छ वातावरण देने का प्रयास कर रहे हैं।

हर दिन होता है पौधरोपण 
विक्टोरा टूल्स के मालिक एसएस बांगा की कंपनी में तीन हजार से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। उन्होंने एक नियम बनाया है कि हर एक कर्मचारी अपने जन्म दिन पर एक फलदार वृक्ष का पौधा लगाए। इतने कर्मचारियों में रोजाना किस न किसी का जन्मदिन होता है और वह अपने साथियों के साथ पौधरोपण करता है। यही नही इस पौधे की देखभाल का जिम्मा भी उसी कर्मचारी का होता है। नियम यह भी है कि  कर्मचारी दिन में एक बार अपने पौधे की देखरेख करे और समय हो तो उसे सींचे। दंपति ने कर्मचारियों के साथ मिलकर सात लाख पौधे लगाने का संकल्प लिया है। अभी तक आठ हजार पौधे लगाए जा चुके हैं जिनमें करीब आधे तो वृक्ष भी बन चुके हैं। 

दादा-दादी की परंपरा को बढ़ा रहे  
एसएस बांगा बताते हैं कि बचपन में वह दादा-दादी का पौधे लगाते देखते थे, पहले तो उनके साथ शौक में जुड़े लेकिन दादा दादी की नसीहत दिल में बैठ गई। वह बताते हैं कि दादा-दादी पौधों को संतान की तरह मानते थे। उनकी शिक्षा को अब वह आगे बढ़ाना चाहते हैं। दपंति से प्रेरित होकर उनके दोस्त, रिश्तेदार भी जन्मदिन पर पौधरोपण करने लगे हैं। 

फल और छायादार पौधे लगाते 
मीनू बांगा कहती हैं कि शहर में फलदार पौधे भी लगातार कम हो रहे हैं। पहले छायादार पौधे लगाते थे। अब उनकी जगह फलदार पौधे लगाते हैं। ताकि लोगों के साथ पक्षियों को भी खाने के लिए फल मिल सकें। सेक्टर 15 की ग्रीन बेल्ट में अमरूद, बेर, मौसमी, नींबू, अंगूर, आंवला, चीकू, इमली, जामुन, तुलसी, पुदीना, धनिया, बरगद, पीपल, नीम आदि के पौधे लगाए हैं। फैक्टरी भ्रमण पर आने वाले विदेशी मेहमानों से भी यादगार में पौधरोपण करवाया जाता है। बांगा के अनुसार वे चाहे किसी भी वक्त घर आएं। वे अपने पार्क और ग्रीन वेल्ट में खुद के हाथ से लगाए पौधों को एक बार देखने जरूर जाते हैं। एक बार लगाए गए पौधों को देख लूं तो बिस्तर पर नहीं जाता। यह संवेदनशीलता वे अपने बच्चों को भी सिखा रहे हैं। 



 

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