सुखना कैचमेंट एरिया पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर हाईकोर्ट ने कहा, तत्काल रोकें निर्माण कार्य

Chandigarh Updated Thu, 24 May 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सुखना कैचमेंट में अवैध निर्माण के मामले में सुप्रीमकोर्ट के आदेशाें का कड़ाई से पालन करने के आदेश जारी किए हैं। कार्यकारी चीफ जस्टिस एमएम कुमार एवं जस्टिस आलोक सिंह की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में सुप्रीमकोर्ट के आदेश 22 मई को जारी हुए हैं और इस तिथि के बाद कैचमेंट एरिया में नए निर्माण पर पूरी तरह रोक रहेगी। खंडपीठ ने पंजाब, हरियाणा और यूटी प्रशासन को निर्देश दिए कि 22 मई के बाद कैचमेंट एरिया में कोई निर्माण होता है, तो ऐसे निर्माण को तत्काल गिरा दिया जाए।
मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार के एडवोकेट जनरल अशोक अग्रवाल ने कहा कि सुखना कैचमेंट एरिया का मामला इंटर स्टेट डिस्प्यूट है। उन्हाेंने कहा कि सबसे बड़ा मुद्दा 500 एकड़ कैचमेंट भूमि से सुखना के लिए पानी के स्रोताें को शुरू करना है, ताकि झील को सूखने से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि कांसल के मास्टर प्लान में सुखना के लिए पानी के स्रोतों के लिए विशेष प्रावधान है। साथ ही, पंजाब सरकार कैचमेंट एरिया के उत्तरी क्षेत्र सुखना के लिए पानी के नए चैनल शुरू करने पर भी गंभीर है। उन्हाेंने कहा कि पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के आदेशाें के बाद अवैध निर्माण गिराने पर तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी थी। कैचमेंट एरिया में आने वाले नयागांव के कुछ हिस्से में 55 साइटाें में अवैध निर्माण पाया गया। इनमें से 32 साइटाें पर निर्माणकार्य में पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई। उन्हाेंने कहा कि कैचमेंट एरिया का चार फीसदी हिस्सा कांसल एरिया में है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन से कहा कि उन्हें सुखना के कैचमेंट एरिया को लेकर जानकारी मुहैया करवानी चाहिए, ताकि लोगों को वास्तविक स्थिति का पता चल सके। इस पर चंडीगढ़ प्रशासन के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल संजय कौशल ने कहा कि प्रशासन इस दिशा में जुटा है और इस मामले में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया की मदद ली जाएगी। हाईकोर्ट ने मामले की आगामी सुनवाई 10 जुलाई के लिए निर्धारित की है।
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हाईकोर्ट, रॉक गार्डन भी बने बाधक
कैचमेंट एरिया के प्रभाविताें की ओर से वकील राजीव आत्माराम ने कहा कि सुखना के लिए प्राकृतिक पानी की आपूर्ति के लिए हाईकोर्ट और रॉक गार्डन भी बाधक हैं। उन्हाेंने कहा कि यहीं से कांसल नदी बहती थी, जिसका पानी सुखना झील तक जाता था। उनकी इस दलील पर हाईकोर्ट ने कोई टिप्पणी नहीं की।

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