दक्षिणी सेक्टर में भी पानी की मारामारी

Chandigarh Updated Tue, 22 May 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। दक्षिण सेक्टर की सोसाइटियों में रहने वाले उस दिन अपने आप को किस्मत वाले समझते हैं, जब उन्हें फुल प्रेशर में पानी मिलता है। सोमवार को भी सैकड़ों परिवारों को लो प्रेशर की समस्या से जूझना पड़ा। यहां की सोसाइटियों को सेक्टर-52 के वाटर वर्क्स से सप्लाई आती है, लेकिन इस समय हालत यह है कि लोगों की टंकियां सूखी ही रह जाती हैं।

ऊपरी मंजिल तक पानी को चाहिए 15-18 पाउंड प्रेशर
सेक्टर-52 के वाटर वर्क्स से जब पानी की सप्लाई आती है, उस समय 40 पाउंड का प्रेशर होता है। लेकिन, सोसाइटियों तक पानी पहुंचते-पहुंचते इसका प्रेशर पांच पाउंड हो जाता है। ऐसे में फ्लैटों तक तो दूर, बूस्टर तक भी बमुश्किल ही पानी पहुंच पाता है। फासवेक के प्रेस सचिव एसएस भारद्वाज का कहना है कि पिछले दिनों बूस्टर में आने वाला प्रेशर चेक किया गया तो पता चला कि यहां पांच पाउंड ही प्रेशर है।
वाटर सप्लाई कमेटी के चेयरमैन मुकेश बस्सी भी मानते हैं कि ऊपरी मंजिलों तक पानी तभी पहुंचेगा, जब प्रेशर 15 से 18 पाउंड होगा। कम से कम 10 पाउंड तो जरूर होना चाहिए। सेक्टर-48, 49, 50 और 51 में कई सोसाइटियां हैं। यहां के बाशिंदों का कहना है कि दक्षिणी सेक्टरों में आ रहे पानी की सप्लाई को जल्द चेक किया जाएगा और लोगों से बातचीत भी की जाएगी।

कहीं आधा घंटा तो कहीं 45 मिनट पानी
सोमवार को शहर के कई एरिए की ऊपरी मंजिलों तक पानी तो पहुंचा, लेकिन किसी को आधा घंटा तो किसी को 45 मिनट पानी मिला, लेकिन दक्षिणी सेक्टर की सोसाइटी में रहने वाले लोगों के पानी का संकट दूर नहीं हुआ। सेक्टर-49 ए के विज्ञान विहास सोसाइटी के अध्यक्ष जेएस दत्ता का कहना है कि नगर निगम सोसाइटियों में फुल प्रेशर से पानी पहुंचाने की जिम्मेवारी से पीछे भाग रहा है। सेक्टर-50 की प्रोग्रेसिव सोसाइटी की एसोसिएशन के अध्यक्ष त्रिलोचन सिंह का कहना है कि पानी का प्रेशर इतना कम होता है कि बूस्टर भी भर नहीं रहे हैं और ऊपरी मंजिलों पर रहने वालों को पानी की बूंद-बूंद के लिए तरसना पड़ता है।

एक साल से लटका है काम
सेक्टर-51 की हाउसिंग बोर्ड में रहने वाले लोगों को कजौली का पानी पहुंचाने के लिए पाइप डालने का काम किया जा रहा है, लेकिन यह काम एक साल से लटक रहा है। चार माह पहले यह काम रोड कट की मंजूरी के कारण रुक गया था, लेकिन अब रोड कट का काम शुरू होने के बाजवूद 1 लाख 80 हजार रुपये की लागत से अलाट हुआ काम शुरू नहीं हो सका है। ये पाइपें बूस्टर तक पानी पहुंचाने के लिए डाली जा रही है।

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