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प्रेस करने वाले का बेटा आईआईटी में छाया

Chandigarh Updated Sat, 19 May 2012 12:00 PM IST
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चंडीगढ़। सुनील कुमार (17) के सिर पर न तो पक्की छत है और न ही पढ़ने को पैसे। पिता 25 साल से प्रेस करके किसी तरह झोंपड़ी में रहने वाले पांच सदस्यों के परिवार का खर्च चला रहे हैं। इस सबके बावजूद इस होनहार छात्र ने आईआईटी जेईई में 2791वां रैंक पाकर सबके सामने एक मिसाल पेश की है।
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सेक्टर-38 के प्लाट नंबर 1030 में पिछले 25 सालों से प्रेस करने वाले मिठाई लाल और पत्नी रेखा के पास सुबह से ही बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ था। खुशी के मारे दोनों के पैर जमीं पर नहीं पड़ रहे थे। अनपढ़ मां-बाप को आईआईटी के मायने भी नहीं पता, लेकिन लोग बता रहे हैं कि बेटे ने बड़ा काम किया है। कोठी में रहने वाले लोगों ने पूरे परिवार को वीआईपी की तरह सम्मान दिया। शहर के सेक्टर-16 के गवर्नमेंट मॉडल स्कूल में 12वीं के छात्र सुनील कुमार ने बताया कि उसने शुरू से ही आईआईटी करने का सपना देखा था।
सुनील ने बताया कि उसके पास आईआईटी की कोचिंग के लिए पैसे नहीं थी। एक दिन उनके पड़ोस में रहने वाली ज्योति आंटी ने सेक्टर-37 स्थित गिटजी (जीआईआईटी-जेईई) में कोचिंग की सिफारिश की। डायरेक्टर अनिल वर्मा ने बताया कि उसकी लगन को देखते हुए उन्होंने कोचिंग निशुल्क दी। वर्मा ने बताया कि जगह की कमी के कारण वह सुनील के लिए सुबह 7.30 बजे ही कोचिंग सेंटर का गेट खोल देते थे, जबकि रात 10 बजे तक सुनील कोचिंग सेंटर में ही तैयारी करता था। वर्मा ने बताया कि पिछले साल उनके दफ्तर के सामने ही चाय बनाने वाले राजा राम के बेटे अमित यादव को भी संस्थान ने आईआईटी की राह दिखाई थी।
उत्तरप्रदेश के प्रतापगढ़ के सरवरपुर निवासी सुनील ने कहा उसकी मंजिल अभी दूर है। उसका सपना आईएएस बनना है। आईआईटी दिल्ली से कंप्यूटर साइंस में करना चाहते हैं।

मां-बाप को करूंगा घर गिफ्ट
सुनील ने कहा कि उनकी जिंदगी खुले आसमान के नीचे गुजरी है। इसलिए वह अभिभावकों को एक सुंदर सा घर गिफ्ट में देना चाहते हैं।

मां के बोल
मेरे बेटे ने बहुत मेहनत की है। तैयारी के लिए दिन रात एक कर दिया। जमीन पर बोरी बिछाकर इसने तैयारी की है।
- रेखा (सुनील की मां)

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