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देश की पहली महिला पायलट बेअंत कौर नहीं रहीं

Chandigarh Updated Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
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मोहाली। भारत में पहली बार प्राइवेट पायलट लाइसेंस हासिल करने वालीं बेअंत कौर का रविवार को यहां निधन हो गया। राजीव गांधी और संजय गांधी को 50 के दशक में विमान उड़ाने के लिए प्रेरित करने वाली वाली बेअंत कौर अपने पति एयर वाइस मार्शल (रिटायर्ड) हरजिंदर सिंह के निधन के बाद से भतीजे के साथ मकान संबंधी विवाद को लेकर काफी मुश्किल में रहीं और उन्हें अपने ही मकान से बहन सतवंत कौर समेत बेदखल होकर एक रिश्तेदार के घर रहना पड़ा।
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बेअंत कौर के एक रिश्तेदार के मुताबिक कौर के कनाडा निवासी भतीजे के पहुंचने के बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 9 अप्रैल 1917 को अविभाजित पंजाब के लायलपुर (अब पाकिस्तान में) के सिख परिवार में जन्मीं बेअंत कौर ने लायलपुर से ही मेट्रिक किया।
आजादी से पहले के सालों में वायुसेना अधिकारी हरजिंदर सिंह से विवाह के बाद फ्लाइंग का सबक सीखना शुरू किया था। उन्हें कानपुर से प्राइवेट पायलट लाइसेंस मिला। हालांकि उन्होंने कभी स्वतंत्र रूप से उड़ान नहीं भरी लेकिन वे खुद के चार सीटर विमान की उड़ान में पति कासाथ देती थीं। बेअंत को सहायक पायलट के रूप में 70 घंटे की उड़ान का अनुभव था। महज मेट्रिक होने के बावजूद अपनी ललक के कारण उन्होंने पायलट का लाइसेंस पाने में सफलता हासिल की। एक समय पति-पत्नी लगभग रोज उड़ान भरते थे।
हरजिंदर सिंह के रिटायर होने पर 1964 में दोनों कानपुर से चंडीगढ़ में आ बसे और उन्हें सेक्टर 3 में चार कनाल का प्लाट अलाट किया गया। चंडीगढ़ आकर पूर्व एयर वाइस मार्शल पंजाब और हरियाणा सरकारों के तकनीकी सलाहकार भी रहे। इस दौरान भी बेअंत कौर को उड़ान का शौक पूरा करने के मौके मिले। इसी समय उन्होंने अपनी बहन सतवंत कौर को भी पायलट लाइसेंस हासिल करने के लिए प्रेरित किया। 1971 में बेअंत कौर के पति हरजिंदर सिंह का हार्ट अटैक से निधन हो गया था।
बेअंत कौर के एक रिश्तेदार ने बताया कि उन्होंने अपने भतीजे को गोद लिया था। दत्तक पुत्र कर्नल एमएस बैंस से विवाद के बाद उन्हें बहन समेत घर से निकलना पड़ा और तब से वे एक संबंधी के घर रह रही थीं। वर्ष 2005 में उन्होंने अपना घर डेढ़ करोड़ में बेच दिया। बाद में कांग्रेस अध्यक्ष से मुलाकात करके बेअंत कौर ने एक करोड़ रुपये राजीव गांधी फाउंडेशन को दान कर दिए थे।
मार्च 2006 में बेअंत कौर की बहन सतवंत कौर का निधन हो गया। तब से उनका स्वास्थ्य भी खराब रहने लगा था।
ये बेअंत कौर ही थीं जिन्होंने राजीव गांधी और संजय गांधी को पायलट बनने के लिए प्रेरित किया। एक बार खुद बेअंत कौर ने बताया था कि 1955-56 में 10-12 साल के रहे राजीव और संजय उनके साथ विमान में उड़ान भरते और फ्लाइंग के बारे में तरह-तरह के सवाल करके जानकारी लिया करते थे। इसी के बाद एक दिन राजीव ने अपनी मां इंदिरा से कह दिया था कि वे पायलट ही बनेंगे।

दो विमान थे, एक पेक को दिया
हरजिंदर सिंह और बेअंत कौर दो विमानों के मालिक थे। इनमें से एक तो उन्होंने कानपुर में पुरेवाल को गिफ्ट कर दिया। दूसरा विमान बाद में उन्होंने चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कालेज को दान दे दिया, जो आज भी पेक के एयरोनॉटिकल डिपार्टमेंट में रखा हुआ है।

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