12 करोड़ खर्च कर भी राहत नहीं

Chandigarh Updated Sun, 13 May 2012 12:00 PM IST
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चंडीगढ़। नगर निगम के जनस्वास्थ्य विभाग का वार्षिक बजट 12 करोड़ 925 रुपये है लेकिन फिर भी शहरवासियों को पानी की सप्लाई सही तरीके से नहीं मिल रही है। पिछले बजट में जनस्वास्थ्य विभाग को 10 करोड़ रुपये मिले थे। शनिवार को भी शहरवासियों को पानी के लो प्रेशर की समस्या से जूझना पड़ा। दक्षिणी सेक्टरों की सोसाइटी में पहली और दूसरी मंजिल पर रहने वाले लोग सुबह-शाम प्रेशर का इंतजार ही करते रहे। कई जगह पानी पहुंचा तो वहां पर प्रेशर लो था या फिर लोगों को ग्राउंड फ्लोर पर काम करना पड़ा। उत्तरी सेक्टरों में सुबह 7 बजे तक ऊपर की मंजिलों तक पानी पहुंचा लेकिन उसके बाद आना बंद हो गया। पानी का इतना लो प्रेशर रहा कि बूस्टर भी पूरी तरह से भर नहीं सके। उत्तरी सेक्टर में सेक्टर-20 से लेकर 30 तक और सेक्टर-14 और 15 में सुबह और शाम अधिकतर इलाकों में पहली और दूसरी मंजिल तक पानी बूंद-बूंद ही टपका। इन सेक्टरों में दोपहर को भी पानी की दिक्कत रही। शाम को राहत जरूर मिली।
आखिर कब दूर होगी दिक्कत
इस साल भी नगर निगम ने अलग-अलग योजनाओं में करोड़ों रुपये खर्च करने की योजना बनाई है।
. 3 करोड़ रुपये की लागत से खराब हो चुके ट्यूबवेलों की बोरिंग होगी, नगर निगम का दावा है कि हर साल 10 से 15 ट्यूबवेल जबाव दे जाते हैं। शहर में 210 ट्यूबवेल हैं।
. 2 करोड़ की लागत से पानी का प्रेशर बढ़ाने के लिए मांग के अनुसार बूस्टर लगाने का दावा
. 2 करोड़ रुपये से सेक्टर-18,19,20,22 और 23 में पानी सप्लाई करने वाली पाइपों को बदला जाएगा। नगर निगम का दावा है कि इन पाइपों को 50 साल से ज्यादा समय हो गया है।
. 50 लाख रुपये वाटर सप्लाई हाउसों की रेनोवेशन और मरम्मत पर खर्च किए जाएंगे
. 1 करोड़ रुपये की लागत से 10 वाटर टैंकर सहित ट्रक खरीदे जाएंगे
. 9 लाख रुपये धार्मिक स्थलों और अन्य स्थानों तक पानी पहुंचाने के लिए ट्रालियां खरीदी जाएंगी

40 हजार लोगों का पानी बर्बाद हो रहा
हर दिन 10 एमजीडी लीकेज के कारण पानी बर्बाद हो रहा है। पूर्व चीफ इंजीनियर पीसी सांघी का कहना है कि हाईटेक शहर में अगर अधिकारी इस लीकेज को ही रोक ले तो पानी की बर्बादी रोक कर शहर की खपत पूरी की जा सकती है। उनका कहना है कि इस आधुनिक युग में हर तरह की लीकेज को बंद किया जा सकता है। उनका कहना है कि 10 एमजीडी पानी से 40 हजार लोगों की मांग पूरी की जा सकती है।

क्या कहना है लोगों का
सेक्टर-15 की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा का कहना है कि वीआईपी सेक्टर होने के बावजूद पहली और दूसरी मंजिल में रहने वाले लोगों को पानी नहीं मिल रहा। उनका कहना है कि नगर निगम के पास लोगों को राहत देने का कोई प्लान नहीं है।
सेक्टर-23 डी की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष गुरदेव राम का कहना है कि पानी का काफी लो प्रेशर रहा है। उनका कहना है कि ग्राउंड फ्लोर वाले तो गुजारा कर रहे हैं, लेकिन ऊपर की मंजिल वालों के हालात काफी खराब हैं।
सेक्टर-18 में रहने वाली स्मार्टेस्ट वूमेन की कंटेस्टेंट स्नेहा धीर का कहना है कि वह ऊपर की मंजिल पर रहती हैं। रोज सुबह 7 बजे के बाद पानी चला जाता है। पिछले एक सप्ताह से लो प्रेशर की समस्या आ रही है।
सेक्टर-7 सी के मकान नंबर-1542 में रहने वाली स्मार्टेस्ट वूमेन की कंटेस्टेंट अराधना मेहता का कहना है कि शुक्रवार को तो काफी दिक्कत रही, लेकिन शनिवार को पानी की सप्लाई कुछ ठीक रही।

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