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विकास कार्यों के लिए फिर टूटेगी एफडी!

Chandigarh Updated Wed, 13 Feb 2013 05:31 AM IST
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चंडीगढ़। नगर निगम की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन निगम की कमाई नहीं। शहर में हाउस टैक्स लागू करने के लिए प्रशासन भी दबाव बना रहा है, लेकिन निगम इसे मानने के लिए तैयार नहीं है। इससे प्रशासन की ओर से मिलने वाले फंड में भी कटौती की जा रही है। अगर आय के स्रोत का यही हाल रहा तो नए वित्तीय वर्ष में भी विकास कार्य कराने के लिए निगम को फिर से एफडी तुड़वानी पड़ेगी। वर्तमान में काफी प्रयास के बाद एफडी में 455 करोड़ रुपये बचाए गए हैं, लेकिन अगले सत्र में होेने वाले खर्च के लिए इसमें से भी 141 करोड़ रुपये निकालने की संभावना है। अनुबंध कमेटी द्वारा पास बजट में निगम का जो ओपनिंग बैलेंस दिखाया गया है, उसमें भी यह 141 करोड़ कम करके शो किया गया है।
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ढाई साल पहले नगर निगम ने 500 करोड़ रुपये की एफडी करवाई थी, लेकिन प्रशासन द्वारा नगर निगम की रोकी जा रही ग्रांट के कारण इस बचत में से ही राशि निकाल कर काम चलाया जा रहा है। जमा एफडी से नगर निगम को 30 से 40 करोड़ रुपये प्रति साल ब्याज आता है। उधर, अनुबंध कमेटी के भाजपा सदस्य अरुण सूद का कहना है कि अब तक हर बार हवा में ही बजट तैयार हुए हैं। यह उसका ही नतीजा है।


नए वित्तीय वर्ष में कम होगी कमाई
पिछले साल के बजट में संभावित कमाई 141 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन नए वित्तीय वर्ष में 132 करोड़ रुपये की कमाई होने की संभावना है। 31 दिसंबर तक नगर निगम विभिन्न स्रोतों से एक अरब रुपये की कमाई करने में कामयाब रहा है, लेकिन शहर के 4 प्रमुख स्कूलों से छह करोड़ रुपये का प्रापर्टी टैक्स चार्ज करने में अब भी असफल हो रहा है।

गांवों में नहीं खर्च हो रही है ग्रांट
अकाली पार्षद मलकीयत सिंह का कहना है कि हर साल गांवों के विकास के लिए करोड़ाें रुपये का बजट तय किया जा रहा है, लेकिन लाखों भी खर्च नहीं हो रहे हैं। सिर्फ कागजी बजट तैयार न करके यह जरूरी किया जाना चाहिए कि गांवों में भी पूरा बजट खर्च हो। इस बार वित्त एवं अनुबंध कमेटी ने गांव के लिए 5 करोड़ रुपये का बजट तय किया है।

10 करोड़ की ग्रांट पास, हाथ आया कुछ भी नहीं
जवाहर लाल रिव्यूनल मिशन के तहत नगर निगम को पिछले साल एक रुपये की ग्रांट भी नहीं आई, जबकि 10 करोड़ रुपये की ग्रांट पास हुई थी। माना जा रहा है कि प्रशासन द्वारा शहर में हाउस टैक्स लागू करने के आदेश का अनुपालन नहीं होने पर इस लाभ से वंचित कर दिया गया है।

फिर क्यों लगाए जाएं हाउस टैक्स
प्रशासन की ओर से नगर निगम पर हाउस टैक्स लगाने का दबाव बनाया जा रहा है और यह भी कहा जा रहा है कि जितना टैक्स इकट्ठा होगा, उसकी आधी राशि मैचिंग ग्रांट के तौर पर मिलेगी। लेकिन, साल 2002 से शहर में प्रापर्टी टैक्स लागू होने के बावजूद प्रशासन ने अब तक मैचिंग ग्रांट नगर निगम को नहीं दी है, जबकि इस पर भी मैचिंग ग्रांट के लिए यही कंडीशन है।

बेरोजगारों के फंड में भी कटौती
प्रस्तावित बजट के अनुसार नगर निगम ने स्वयं रोजगार योजना के तहत एक करोड़ रुपये का बजट पिछले साल पास किया था, लेकिन नगर निगम अब तक मात्र 25 लाख ही खर्च कर पाया है। इस साल के लिए नगर निगम ने इस योजना के लिए सिर्फ 25 लाख रुपये का बजट रखा है, जबकि शहर में हजारों युवा बेरोजगार हैं।

कोट्स.............
इस बार काफी संतुलित बजट तैयार हुआ है। एफडी भी नगर निगम की प्रापर्टी है। ऐसे में विकास कार्यों के लिए उसमें से राशि निकालना कोई गलत नहीं है। हां, इतना जरूर है कि शहरवासियों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा।
- सुभाष चावला, मेयर

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