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युवाओं की सोच के साथ खानपान तक में आया बदलाव

Chandigarh Updated Sun, 10 Feb 2013 05:31 AM IST
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चंडीगढ़। अमर उजाला ने चंडीगढ़ पुलिस के साथ मिलकर गली क्रिकेट लीग के जरिए न सिर्फ दस हजार खिलाड़ियों को सकारात्मक काम की ओर मोड़ा, बल्कि लाखों लोगों की सोच बदल दी। अमर उजाला-सीपीजीसीएल में भाग लेने वाले युवाओं में नशे जैसी बुराइयों से दूर रहने का जज्बा तो जागा ही, साथ ही उनमें सिंपल खान-पान और साधारण रहन-सहन जैसे गुण भी पनपने लगे। जिंदगी में कुछ करने का जज्बा और प्रतियोगी भावना का जबर्दस्त विकास हुआ है। यह निष्कर्ष निकला है पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) के सेंटर फार पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन की ओर से गली क्रिकेट लीग पर कराए गए एक अध्ययन में। सेंटर के प्रमुख प्रो. अनिल मोंगा ने अध्ययन रिपोर्ट चंडीगढ़ पुलिस को सौंप दी है। अमर उजाला-चंडीगढ़ पुलिस गली क्रिकेट लीग को लिम्का बुक आफ रिकार्ड्स-2013 में भी शामिल किया गया है।
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चंडीगढ़ में हुई देश की सबसे बड़ी गली क्रिकेट लीग में 9469 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। 557 टीमें नॉक आउट दौर में उतरीं और अंत में लीग मुकाबले के लिए चुनी गईं 12 टीमों का नाम सेफ सिटी प्रमोटर्स, ईव टीजिंग डेस्ट्रायर और चेन स्नेचिंग क्रेकर्स जैसे नामों से नवाजा गया जो सामाजिक बुराइयों को मिटाने का संकल्प याद दिलाती रहीं।

पीयू की इस अध्ययन टीम ने 25 खिलाड़ियों के परिवारों से गली क्रिकेट लीग से हुए फायदे के बारे में बारीकी से जानने की कोशिश की। इसमें खुलासा हुआ कि गली क्रिकेट के पहले भी खेल की ओर युवाओं का रुझान था, लेकिन अमर उजाला के इस आयोजन ने उन्हें एक दायरे में रहने और जीवन को खुशहाल बनाने का सलीका सिखा दिया। इससे अनुशासन, टीम वर्क और जीत के लिए कठित परिश्रम का संदेश भी दिया गया। युवाओं की सोच में बदलाव आया और खेल के प्रति बढ़े आकर्षण से खान-पान सहित रोजमर्रा की जिंदगी में भी परिवर्तन दिखने लगा है। खेल ने किशोर और युवाओं नशे की लत से दूर करने में अहम भूमिका निभाई और आपराधिक वारदातों में लिप्त नहीं होने का संदेश भी दिया।
इस अध्ययन के बाद प्रो. मोंगा की टीम ने निष्कर्ष निकाला कि गली क्रिकेट टूर्नामेंट ने सिटी ब्यूटीफुल को महफूज और सुंदर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस आयोजन से युवाओं को खेल के जरिये सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने में मदद मिली और पुलिस के प्रति विश्वास में भी काफी बढ़ोतरी हुई। इस आयोजन के जरिये न केवल 10 हजार खिलाड़ियों को जोड़ा गया, बल्कि उनके परिवारों और मित्रों ने भी इसे अपना मानकर सहयोग किया। पंजाब यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर पुलिस एडमिमिस्ट्रेशन के को-ऑर्डिनेटर प्रोफेसर अनिल मोेंगा के मुताबिक इस आयोजन से आम लोगों का पुलिस पर विश्वास बढ़ने सहित बेहतर कनेक्ट का मौका मिला। प्रो. मोंगा सहित असिस्टेंट प्रोफेसर अक्षत मेहता और असिस्टेंट प्रोफेसर कुलदीप सिंह सहित आठ स्कॉलर ने ‘इवोल्यूशन ऑफ अमर उजाला-सीपीजीसीएल एंड कम्युनिटी पुलिसिंग’ पर अध्ययन कर, अपनी रिपोर्ट चंडीगढ़ पुलिस को सौंपी है। इसमें बीट पुलिस की भूमिका की सराहना की गई और आयोजन के दौरान प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष लोगों के टीम वर्क ने बेहतरीन परिणाम तक इस आयोजन को पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
बुजुर्गों को भी मुहिम से जोड़ने का फायदा मिला
अमर उजाला और चंडीगढ़ पुलिस की ओर से आयोजित गली क्रिकेट लीग (सीपीजीसीएल) के जरिये सिटी ब्यूटीफुल के युवा वर्ग के अलावा बुजुर्गों को भी जोड़ा गया। आयोजन के दौरान बुजुर्गों के लिए सुखना लेक पर आयोजित वॉक और भ्रूण हत्या के खिलाफ नुक्कड़ नाटक के जरिये जो आवाजें उठाई गईं, इससे भी आम लोगों का पुलिस का विश्वास बढ़ा है।
1600 लोग शामिल किए गए अध्ययन में
पीयू के प्रोफेसर्स की टीम की ओर से किए गए अध्ययन में विभिन्न वर्गों के 1600 लोगों को शामिल किया गया। इनमें 600 खिलाड़ियों के अलावा आयोजन से जुड़े 100 कर्मियों के विचार भी पूछे गए। इनमें 100 पुलिस कर्मियों सहित दर्शकों और खिलाड़ियों और पुलिसकर्मियों के 600 परिजन भी शामिल किए गए।
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अध्ययन में सामने आए गली क्रिकेट के फायदे...
. अमर उजाला की इस लीग में भाग लेने वाले युवाओं की मानसिकता भी में धीरे-धीरे बदलाव आने लगा है।
. सीपीजीसीएल ने युवाओं सहित समाज के अन्य वर्गों को भी अपने साथ जोड़ा। कनेक्ट का इससे बेहतरीन अवसर और क्या होगा!
. लोगों में पुलिस के प्रति डर कम हुआ और चंडीगढ़ के युवाओं में बीट के पुलिसकर्मियों पर विश्वास बढ़ा है।
. इस अभियान की सफलता से सुरक्षा मानकों में भी बदलाव आने लगे हैं। इन्हें धीरे-धीरे पूरा करके पुलिस अपने उद्देश्यों को हासिल कर, अग्रणी पुलिस के स्थान पर होगी।

कोट्स
चंडीगढ़ निवासी भी चाहते हैं उनकी आधुनिक सोच और इस शहर का एक अलग वजूद हमेशा कायम रहे। गली क्रिकेट लीग के जरिए पहली बार सामने आए पुलिस के अच्छे बर्ताव में अगर थोड़ा और बदलाव आए तो कम्युनिटी पुलिसिंग सहित दूसरे अभियान से जुड़ने के लिए और लोग सामने आएंगे।
प्रो. अनिल मोंगा
कोऑर्डिनेटर, सेंटर फार पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन, पीयू

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