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मोहाली में जीवंत हुआ दांडी मार्च

Chandigarh Updated Tue, 29 Jan 2013 05:30 AM IST
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मोहाली। ब्रिटिश हुकूमत की जड़ें हिला देने वाले महात्मा गांधी के दांडी मार्च का दृश्य मोहाली में जीवंत हुआ है। इंडस्ट्रियल एरिया फेज सात स्थित गैरी आर्ट्स ने राष्ट्रपिता के बलिदान दिवस पर ग्यारह मूर्ति बनाई हैं। यह बिल्कुल वैसी ही हैं, जैसी की राष्ट्रपति भवन में कांस्य प्रतिमाएं लगी हैं। इनमें सबसे आगे महात्मा गांधी की प्रतिमा है। उसके पीछे दस अन्य लोगों की प्रतिमाएं हैं, जोकि अलग-अलग समुदाय और वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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गैरी आर्ट्स के एमडी अबनिंदर सिंह गरेवाल ने बताया कि यह फाइबर ग्लास में बनाई गई हैं। बरनाला के एक कालोनाइजर ने इसकी डिमांड की थी। यहां कुछ दिन प्रदर्शन के बाद इन्हें बरनाला भेज दिया जाएगा। इसे बनाने से पहले दिल्ली में लगी प्रतिमाओं की करीब साठ फोटोग्राफ हर ऐंगल से ली गईं, जिसके बाद यह तैयार हुई। गरेवाल ने बताया कि उनका मकसद इसके बाद इन्हीं ग्यारह मूर्तियों को छोटे आकार में बनाना है, ताकि लोग उसे ड्राइंग रूम में रख सकें। 66 वर्षीय गरेवाल को हाल ही में पता चला कि उन्हें ब्लड कैंसर है। पर बीमारी न तो उनके हौसलों को कम कर सकी और न ही उनके सपनों को तोड़ सकी है।
गरेवाल का सपना है कि वह अपने गांव नानुकी, नाभा में एक कला मंदिर बनाएं। यह एक ऐसा शाहकार होगा कि लोग अंदर कदम रखते ही ठहर जाएंगे। यहां हर चीज जीवंत होगी। अगर कोई युवती किताब पढ़ रही है तो वह प्रतिमा इतनी सजीव होगी कि लोगों को लगेगा कि उनकी आवाज से युवती डिस्टर्ब हो जाएगी। इसी तरह की कई अन्य चीजें इस कला मंदिर में होंगी।

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कॉमनवेल्थ का शेरा डिजाइन किया था
गरेवाल बताते हैं कि वह बचपन में पेंटिंग करते थे, 1963 में उन्होंने पहला स्टैचू बनाया और उसके बाद पीछे मुड़ कर नहीं देखा। दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स का शुभंकर शेरा भी उन्होंने ही तैयार किया था। कल्पना चावला की मौत पर उनकी प्रतिमा बनाई, जोकि चावला के माता-पिता को दी गई। साइंस सिटी, कपूरथला में उन्होंने कुतुब-मीनार वाला अशोक स्तंभ बनाया। उस स्तंभ पर पाली भाषा में जो संदेश लिखा है, उसे भी हूबहू उकेरा गया। गरेवाल ने हंसते हुए बताया कि एक बार उन्होंने भैंस बनाई तो उनकी पत्नी ने सवाल किया। परंतु वह भैंस एक दूध बेचने वाला ले गया और अपने घर की छत पर लगाई। उनका बनाया निहंग सिंह, चरखा कातती युवती, भंगड़ा डालते गबरू, गिद्दा डालतीं मुटियारें काफी लोकप्रिय हुईं। उनकी बनाई 11 फीट ऊंची बुद्ध की मूर्ति लेह, डिजायनर रितु बेरी के घर और सुखना लेक पर लगी है। यूटी म्यूजियम के लिए उन्होंने 16 फीट का डायनासोर बनाया। हवेली, राजपुरा के लिए उनका बनाया महाराजा रंजीत सिंह का दरबार भी काफी पसंद किया गया।
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