चलो! देश ने तो भट्टी की गुदगुदी का सम्मान किया

Chandigarh Updated Sat, 26 Jan 2013 05:30 AM IST
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चंडीगढ़। हर मौके पर गुदगुदाने की कला के बल लाखों दिलों पर राज करने वाले दिवंगत जसपाल भट्टी को जब शुक्रवार रात पद्म भूषण देने का ऐलान हुआ, तो उनकी पत्नी सविता भट्टी की आंख से आंसू छलक पड़े। एक टीस सी बाहर निकली और बोलीं, ‘ यहां का प्रशासन न सही, देश ने तो उनकी गुदगुदी को याद रखा।’ अवार्ड एनाउंस होने के बाद अमर उजाला से बातचीत में उन्हाेंने कहा कि ऐसे महान शख्स को भारत सरकार ने याद रखा, यह मेरे लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है।’
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शुक्रवार रात को सेक्टर-19 स्थित निवास पर टीवी पर भट्टी की तस्वीर के साथ चल रहे अवार्ड के समाचार को देखते हुए सविता भट्टी की आँखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि भट्टीजी पूरी दुनिया को अपना परिवार मानते थे। ऐसे में प्रशसन की उपेक्षा का हमें दुख जरूर है, लेकिन अफसोस नहीं।

भारत सरकार ने भट्टी को मरणोपरांत पद्म भूषण पुरस्कार देने का फैसला लेकर उनकी यादों को एक बार फिर से ताजा कर दिया है। 25 अक्तूबर को हमेशा के लिए दुनिया को अलविदा कह चुके भट्टी को पद्म भूषण देने की घोषणा उनके निधन के ठीक तीन माह बाद 25 जनवरी को हुई। भट्टी के परिवार के लिए 25 तारीख शायद कभी न भूलने वाली है। यही वजह है कि 25 जनवरी की सुबह से ही भट्टी के परिवार की आंखें नम थी। शाम को सफर करने के बाद सविता भट्टी अपनी बेटीं के साथ घर लौटीं तो उन्हें टीवी के माध्यम से भट्टी को मरणोपरांत पद्म अवार्ड मिलने की सूचना मिली। घर पर सन्नाटा था, लेकिन घर के हर एक कोने में जसपाल भट्टी की यादें बसीं थीं। सविता भट्टी ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री पवन कुमार बंसल जी से भट्टी के लिए शहर में कोई यादगार बनाने की मांग की थी। उन्हें उम्मीद है कि बंसल ने ही उनका नाम इस अवार्ड के लिए प्रस्तावित किया होगा।
तोहाडे मुंडे नूं बड्डा अवार्ड...
शुक्रवार रात जब टीवी पर बार-बार जसपाल भट्टी की तस्वीर दिखने लगी तो मां मंजीत कौर भावुक हो गईं। इस पर सविता भट्टी ने जसपालजी की मां को बताया, ‘तोहाडे मुंडे नूं सरकार वल्लीं बोहत वड्डा अवार्ड दित्ता गया ए।’ इतना सुनकर मंजीत कौर की आंख नम हो गई और उन्होंने फोटो खिंचाने से भी मना कर दिया।

दूसरे साल भी पद्म अवार्ड से खाली रही झोली
चंडीगढ़। लगातार दूसरे साल चंडीगढ़ की झोली में कोई पद्म अवार्ड नहीं आया। चंडीगढ़ के निवासी स्वर्गीय जसपाल भट्टी को पद्म भूषण अवार्ड भी पंजाब के खाते से मिला है।
शिक्षा, कला, साहित्य से लेकर चिकित्सा जगत में शहर में कई प्रख्यात लोगों के होने के बाद भी किसी को इस बार भी पद्म अवार्ड नहीं मिला सका। शहर के 15 से अधिक लोगों के नाम पद्म अवार्ड कमेटी के पास पहुंचे थे। पिछले साल भी कई लोगों के नाम कमेटी के पास गए थे, लेकिन इनमें से कमेटी को कोई भी योग्य नहीं लगा।
अवार्ड से महरूम रहने के पीछे दोष चंडीगढ़ प्रशासन का भी है। प्रशासन की लेटलतीफी के कारण इस बार भी पद्म पुरस्कार के लिए शहर के दो लोगों के नाम पर विचार ही नहीं हो सका। पद्म अवार्ड के नाम प्रस्तावित करने की अंतिम तिथि बीत जाने के लगभग डेढ़ माह बाद प्रशासन ने भारत सरकार के पास चंडीगढ़ से दो नाम भेजे। अंतिम तिथि 20 नवंबर थी जबकि प्रशासन ने नाम जनवरी के पहले सप्ताह में भेजे थे। इनमें पीजीआई के पल्मनरी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डा. दिगंबर बेहरा और पीयू के केमिस्ट्री विभाग के रिटायर्ड प्रोफेसर व सिंथेटिक आर्गेनिक केमिस्ट्री के जाने-माने वैज्ञानिक प्रो. सतिंदर वीर केसर के नाम शामिल हैं।
ऐसे चली प्रक्रिया
प्रशासन के पास चार आवेदन पहुंचे थे और इनमें से दो नाम शार्टलिस्ट करने के लिए प्रशासन ने कई बैठकें की और इसके बाद दो नाम मंजूरी के लिए प्रशासक शिवराज पाटिल के पास भेजे गए। पद्म अवार्ड के लिए सीधा आवेदन नहीं किया जा सकता है। किसी के माध्यम से नाम प्रस्तावित कर पद्म अवार्ड कमेटी को भेजा जाता है।
पिछले दस सालों में अब तक इन्हें मिले अवार्ड
पद्म श्री
2004- कोई नहीं
2005-प्रो.जेएस ग्रेवाल
2006-ड़ॉ.केएल जाकिर, डॉ.आरके साबू
2007-डॉ.एचएस चावला
2008-कोई नहीं
2009-प्रो.आरसी सोबती
2010-कोई नहीं
2011-डॉ.नीलम मान सिंह
2012-कोई नहीं
पद्म भूषण
2006-हीरा लाल सिब्बल, डॉ.केके तलवार
2007-प्रो.जीेस कालकत
2008-डॉ.जेएस चोपड़ा, प्रो.बीएन गोस्वामी

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