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कोहरे के बीच ट्रेन दौड़ने में पांच साल लगेंगे

Chandigarh Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
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चंडीगढ़। अगले तकरीबन पांच साल तक कोहरे में ट्रेनों की यह लेट लतीफी झेलनी पड़ेगी। रेलवे के पास अब तक ऐसा कोई भी उपकरण नहीं है जो कोहरे के बीच ट्रेन को उसकी सामान्य स्पीड से दौड़ाने में कारगर हो। सीएसआईओ अगले पांच साल में एनहॉंस विजन सिस्टम तैयार करेगी तब कहीं जाकर ट्रेनों को घने कोहरे में भी उसकी तय स्पीड से दौड़ाया जा सकेगा। फिलहाल इस वक्त ट्रेनें पुराने ढर्रे फॉग सेफ डिवाइजस की आवाज सुनकर ही चल रही हैं।
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कोहरे में ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के लिए सेंट्रल साइंटिफिक इंसटूमेंट आर्गनाइजेशन ने रेलवे के साथ एमओयू करार किया है। सीएसआईओ के निदेशक पवन कपूर ने बताया कि अगले पांच साल के दौरान उनके वैज्ञानिक एनहॉंस विजन सिस्टम तैयार कर लेंगे जो कि ट्रेनों में प्रयोग किया जाएगा। तब जाकर कोहरे में ट्रेनोें को उनकी गति के हिसाब से दौड़ाया जा सकेगा। वहीं रेलवे के सूत्रों का कहना है कि कुछ साल पहले रेलवे ने आईआईटी कानपुर के सहयोग से कोहरे काम करने वाली एक डिवाइस तैयार की थी। यह ट्रेनों की गति को प्रभावित नहीं होने देती, लेकिन इसका उपयोग ही नहीं हो रहा है। अंबाला मंडल के रेल प्रबंधक पीके सांघी ने बताया कि अभी तक ऐसा कोई भी उपकरण रेलवे के पास नहीं है जो कि कोहरे में भी ट्रेन की गति को बनाए रखे। उनके मुताबिक ट्रेन के ड्राइवर फॉग सेफ डिवाइस के माध्यम से ट्रेन चलाते हैं। इस डिवाइस के माध्यम से उनको दो सौ मीटर पहले किसी भी सिग्नल होने की जानकारी मिलती है। कोहरे में ट्रेन की अधिकतम स्पीड स्पीड 60 तथा औसतन स्पीड 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक ही रहती है।

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