पीयू की राजनीति में फंसे प्रशासक के सलाहकार

Chandigarh Updated Thu, 20 Dec 2012 05:30 AM IST
चंडीगढ़। चंडीगढ़ के प्रशासक के सलाहकार केके शर्मा पंजाब यूनिवर्सिटी की राजनीति का शिकार हो गए हैं। शर्मा सीनेट के मानद सदस्य हैं। चंडीगढ़ में लगभग डेढ़ साल पहले प्रशासक के सलाहकार के पद पर आए शर्मा ने हालांकि न तो कभी सीनेट की बैठक में हिस्सा लिया और न ही सिंडीकेट चुनाव में। इसके बाद भी वह पीयू की राजनीति में न चाहते हुए भी फंस गए और मामला पीयू के कुलाधिपति और देश के उप-राष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी तक पहुंच गया।
पीयू में वर्ष 2012-16 तक के लिए नई सीनेट का गठन एक नवंबर को हुआ था। इसके बाद सीनेट के सभी सदस्यों को छह दिसंबर तक दो मेजर और दो माइनर फैकल्टी का विकल्प भेजना था। सिंडीकेट चुनाव में इन्हीं फैकल्टी में ही उन्हें फिर वोट डालने का अधिकार मिलता। पीयू के कुलपति की ओर से गठित कमेटी के सदस्यों की मौजूदगी में सभी सदस्यों के सीलबंद लिफाफे खुले थे, लेकिन शर्मा ने 6 दिसंबर की बजाय 12 दिसंबर को उनकी ओर से चयनित चार फैकल्टी के नाम भेजे। जब तक शर्मा का सीलबंद लिफाफा कुलपति को मिला तब तक कमेटी की बैठक में सभी सदस्यों के लिफाफे खुल चुके थे और सीनेट सदस्यों की ओर से चयनित फैकल्टी सार्वजनिक हो गई थी।
कुलपति प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर शर्मा के बंद लिफाफे को सिंडीकेट की बैठक में ले आए और उन्होंने इस पर सिंडीकेट सदस्यों की राय मांगी। तब तक कुलपति को भी नहीं पता था कि यह लिफाफा शर्मा का है। लेकिन, सिंडीकेट की 15 दिसंबर को हुई बैठक में जैसे ही कुलपति ने यह मामला उठाया, इस पर राजनीति शुरू हो गई। बैठक में जहां अशोक गोयल ने सिंडीकेट में इस बंद लिफाफे को न खोलने की वकालत की, वहीं गोपाल कृष्ण चतरथ ने कहा कि यह लिफाफा खोला जाना चाहिए। इसको लेकर दोनों के बीच काफी बहस भी हुई। बाद में यह तय हुआ कि लिफाफा खोल लिया जाए। तब यह स्पष्ट हुआ कि यह लिफाफा केके शर्मा का है, लेकिन, उनके द्वारा तय फैकल्टी का खुलासा नहीं किया गया। इसके बाद काफी देर तक इस बात को लेकर राजनीति होती रही कि शर्मा को 23 दिसंबर को सिंडीकेट चुनाव में वोट डालने का अधिकार न दिया जाए। काफी देर तक चली बहस के बाद यह तय हुआ कि मामला कुलाधिपति के पास कमेंट के लिए भेजा जाए और यदि वे मंजूरी देते हैं तभी शर्मा को वोट डालने का अधिकार दिया जाए। सिंडीकेट के इस फैसले के बाद अब कुलपति ने यह सारा मामला कुलाधिपति के पास भेजा है और उनसे यह पूछा है कि क्या शर्मा सिंडीकेट चुनाव में वोट डाल सकते हैं या नहीं?

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