तीन साल बाद तैयार हुआ मास्टर प्लान

Chandigarh Updated Thu, 20 Dec 2012 05:30 AM IST
चंडीगढ़। आखिरकार तीन साल के बाद चंडीगढ़ के मास्टर प्लान-2013 का डफ्ट तैयार कर लिया गया। प्रशासन के अधिकारियों ने बुधवार को मास्टर प्लान का ड्राफ्ट प्रशासक शिवराज पाटिल को मंजूरी के लिए सौंपा। पाटिल को प्रति तो सौंपी गई मगर इस पर मास्टर प्लान कमेटी के सदस्यों को हस्ताक्षर ही नहीं थे। इस पर प्रशासक ने अधिकारियों को लताड़ लगाई और चीफ आर्किटेक्ट को मास्टर प्लान कमेटी के सभी सदस्यों से ड्राफ्ट की कापी पर हस्ताक्षर करवाने के लिए दस दिन का समय दिया।
मास्टर प्लान में हो रही देरी पर प्रशासक इससे पहले कई बार अधिकारियों को फटकार भी लगा चुके हैं। 10 दिसंबर को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में मास्टर प्लान को लेकर हुई सुनवाई के दौरान प्रशासन ने मास्टर प्लान के लिए और समय मांगा था। प्रशासन की इस मांग पर चीफ जस्टिस एके सीकरी व जस्टिस आरके जैन की खंडपीठ ने तीन महीने का समय प्रशासन को और देते हुए 4 मार्च के लिए अगली सुनवाई तय की थी। मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने के लिए पिछले एक सप्ताह से चीफ आर्किटेक्ट सुमित कौर और उनका पूरा विभाग जुटा हुआ था। प्रशासक की मंजूरी के बाद मास्टर प्लान केंद्र सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और इसके बाद ही अधिसूचना जारी होगी। उसके बाद यह प्रशासन की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया जाएगा। लोगों से इस पर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। इसके लिए उन्हें एक माह का समय दिया जाएगा।

अगले बीस साल की जरूरतों पर ध्यान
मास्टर प्लान में शहर की अगले 20 साल की जरूरतों को ध्यान में रखकर खाका तैयार किया जा रहा है। इसमें शहर की इमारतों की ऊंचाई बढ़ाने, डड्डू माजरा के पास मैरिज पैलेस बनाने, सारंगपुर में 66 केवीए सब स्टेशन बनाने, सोलर पार्क बनाने, सेक्टर-53 में ट्रामा सेंटर बनाने और सेक्टर-43 में सब सिटी सेंटर बनाने का उल्लेख किया गया है। मास्टर प्लान में शहर की विरासत को सहेजने के लिए ऐसी इमरातों की पहचान की गई है जिनका संरक्षण बेहद जरूरी है। इसमें ट्रैफिक को कम करने को लेकर भी कई सुझाव दिए गए हैं।

कब क्या हुआ
23 दिसंबर, 2009 को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक साल के अंदर मास्टर प्लान तैयार करने को कहा था। इसके बाद प्रशासन ने चंडीगढ़ की चीफ आर्किटेक्ट सुमित कौर की अध्यक्षता में मास्टर प्लान को तैयार करने के लिए एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया था।
-17 दिसंबर, 2010 को मास्टर प्लान तय समय पर तैयार न होने पर प्रशासन ने हाईकोर्ट से छह माह का समय और मांगा।
-7 सितंबर, 2011 को मामले की सुनवाई के वक्त भी मास्टर प्लान तैयार नहीं हुआ और प्रशासन ने तीन माह का समय और मांगा।
- इस साल 9 जनवरी से लेकर 10 दिसंबर तक कुल छह बार हाईकोर्ट में सुनवाई हुई और हर बार प्रशासन ने हाईकोर्ट में मास्टर प्लान में देरी का अलग अलग तर्क देते हुए एक से तीन माह का समय मांगा।

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