अपने ‘मासूम’ की तस्वीर दिल में उतारे है पाक में बीस साल से कैद कुलदीप

Chandigarh Updated Mon, 17 Dec 2012 05:30 AM IST
चंडीगढ़। लाहौर सेंट्रल जेल में बीस साल से कैद कठुआ निवासी कुलदीप सिंह के दिल में आज भी उसके दो साल के बेटे की तस्वीर हूबहू बसी है। गलती से पाकिस्तानी सीमा में चले गए कठुआ निवासी कुलदीप सिंह को इन बीस सालों में पहली बार जब वकील ओवैश शेख ने उनके घरवालों का संदेश पहुंचाया तो उनकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने वकील से पूछा कि क्या उनका रिशू अब भी 20 साल पहले की तरह हंसता-खेलता है।
भारत-पाक के लोगों के बीच ‘पीस एंबेसडर’ का काम करने वाले वकील ओवैश ने पूर्वी पंजाब के होम सेक्रेटरी की अनुमति के मिलने पर दो दिन पहले लाहौर की कोट लखपत जेल (सेंट्रल जेल) में कड़ी सुरक्षा के बीच मुलाकात की। इस दौरान पाक सेना के एक मेजर रैंक का अफसर और सीआईडी की पूरी टुकड़ी मौजूद रही। कुलदीप ने वकील से अपने उस बेटे के बारे में सबसे ज्यादा जानना चाहा जिससे वह तब अलग हो गया था जब वह महज दो साल का था। शेख ने बताया कि अब तो वह 22 साल का जवान है और पढ़ाई कर रहा है। इतना सुनकर कुलदीप की आंखें भर आईं। उसने बूढ़ी मां और पत्नी तक उसकी कुशलता का संदेश पहुंचाने का आग्रह किया। ओवैश ने कुलदीप को भरोसा दिलाया कि वह जल्द ही लाहौर हाईकोर्ट में उसकी जल्द रिहाई के लिए अपील करेंगे। कुलदीप ने बेटे और पत्नी का संदेश पुहंचाने के एवज में वकील को चाबी का गुच्छा तोहफे में दिया जिसे उसने जेल में खुद बनाया है। एडवोकेट ओवैश शेख ने कहा कि कुलदीप को रहम की अपील करने से रोकना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत और पाकिस्तानी जेल कानून के खिलाफ है। बीस साल से जेल में अच्छे आचरण के चलते कुलदीप को जल्द रिहा किया जा सकता है। कुलदीप के परिवार से मुझे पावर ऑफ अटॉर्नी मिल गई है और मैं हाईकोर्ट में जल्द ही अपील करूंगा।

पांच साल और बाकी है सजा
जम्मू-कश्मीर रियासत के कठुआ जिले के मक्कोवाल गांव के रहने वाले कुलदीप सिंह 1992 में गलती से पाक सीमा में चले गए थे। उसे पाक की सैन्य अदालत ने आठ मई, 1996 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और ट्रायल पीरियड को भी सजा में जोड़ दिया। इससे जेल में उसकी सजा के 20 साल पूरे हो गए हैं। इस समय करीब 40 साल के कुलदीप को पांच साल बाद सजा पूरी होने के बाद वापस भारत भेजा जा सकेगा।

मैं पापा का चेहरा देखना चाहता हूं : मनमोहन
पाक जेल में बंद कुलदीप अपने जिस दो साल के मासूम बेटे रिशू को हर पल याद करता रहता है, वह दरअसल अब मनमोहन सिंह नाम का करीब 22 साल का जवान है। मामूली खेतीबाड़ी के सहारे उसकी मां ने उसे पाला है, लेकिन कई बार पढ़ाई में रुकावट आने के कारण वह अभी महज बारहवीं में पहुंच सका है। उसने अमर उजाला को फोन पर बताया कि वह सरकार से आग्रह करेगा कि उसे पाक का वीजा दिलवा दिया जाए। जेल में ही सही, वह अपने पापा से मिलेगा तो सही।

--योगेश नारायण दीक्षित

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