नगर निगम के अधीन आने वाली दर्जनों डिस्पेंसरियों की हालत खस्ता

Chandigarh Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। सात माह, लगभग 24 डिस्पेंसरियां, 23 करोड़ सालाना बजट और खर्च नहीं किए एक लाख रुपये भी। यही वजह है कि नगर निगम को दो साल पहले सौंपी गई प्राथमिक स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाली डिस्पेंसरियों की हालत खस्ता हो चुकी है और इस दौरान एक नई ईंट भी इन डिस्पेंसरियों में नहीं लगी हैं। अब तक स्वास्थ्य सब कमेटी का गठन ही नहीं हो पाया, जिस वजह से इससे जुड़ा कोई महत्वपूर्ण फैसला नहीं लिया जा सका। निगम और प्रशासन के बीच तालमेल के अभाव की वजह से आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, पीजीआई, जीएमसीएच-32 और सामान्य अस्पताल-16 पर इसका बोझ बढ़ रहा है।

डाक्टरों का टोटा, टपक रहीं छतें
स्टाफ के साथ-साथ डिस्पेंसरियों में डाक्टरों का भारी टोटा है। किसी भी डिस्पेंसरी में बीमारी की जांच के लिए कोई भी अलग से सुविधा नहीं है। सेक्टर-7 और 20 की डिस्पेंसरी की छतें मानसून में टपकने लग जाती हैं। हाल ही में डेंगू ने शहर में आतंक मचाया, लेकिन इन डिस्पेंसरियों में कोई सुविधा नहीं मिल पाई। इन डिस्पेंसरियों में करीब 400 कर्मचारियों की कमी है।

निगम के पास नहीं कोई स्वास्थ्य विशेषज्ञ
नगर निगम के एक सीनियर अधिकारी के अनुसार प्राइमरी स्वास्थ्य विभाग में जितनी भी सुविधाओं की आवश्यकता है, उसके लिए स्वास्थ्य विभाग से जुड़े विशेषज्ञ ही निर्णय ले सकते हैं, जबकि नगर निगम के पास ऐसे तकनीकी अधिकारी ही नहीं हैं। स्वास्थ्य निदेशक प्रशासन के अंतर्गत ही काम कर रहे हैं, इसलिए आगे भी तालमेल का अभाव बने रहने की आशंका है।

क्या चाहते हैं यहां के निवासी
. डिस्पेंसरी में डाक्टरों की कमी को जल्द पूरा किया जाए।
. डिस्पेंसरी में हर बीमारी की जांच के लिए मशीनें और सुविधा होनी चाहिए ताकि पीजीआई और सेक्टर-32 अस्पताल पर बोझ कम हो सके।
. डिस्पेंसरियों में आयुर्वेदिक इलाज की भी सुविधा होनी चाहिए, यहां पर हर तरह की दवा मिलनी चाहिए।
. डिस्पेंसरियों में सफाई व्यवस्था का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए, हर डिस्पेंसरी के बाहर शिकायत पेटी लगाई जानी चाहिए।


कोट..
हर साल करोड़ों रुपये का बजट आने का दावा किया जाता है, लेकिन शहर में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत दिन प्रतिदिन बदतर होती जा रही है।
- चरणजीव सिंह, व्यापार मंडल अध्यक्ष

अगर डिस्पेंसरियों में सभी सुविधाएं मिले तो फिर निजी डाक्टरों के पास जाने की क्या जरूरत पड़े। साथ ही पीजीआई और जीएमसीएच-32 में भी धक्के नहीं खाने पड़ेंगे।
- सुरेंद्र शर्मा, अध्यक्ष, सेक्टर-15, रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन

प्राइमरी स्वास्थ्य विभाग में काफी सुधार की जरूरत है। सबसे पहले तो सब कमेटी के गठन का प्रयास किया जाएगा।
- राजबाला मलिक, मेयर, नगर निगम

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