नौ बूथों का आवंटन रद करने को नोटिस

Chandigarh Updated Tue, 23 Oct 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर के बहुचर्चित बूथ घोटाले में सेक्टर-41 स्थित कृष्णा मार्केट के नौ बूथों की अलॉटमेंट रद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत सोमवार को इन बूथ के मालिकों को नोटिस भेजे गए। इसके अलावा 30 बूथों के आवंटन की नए सिरे से जांच की सिफारिश की गई है। सेक्टर-41 के कृष्णा मार्केट में बूथों के आवंटन में हुए घोटाले का मुद्दा अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था।

उपायुक्त मोहम्मद शाईन की ओर से इन नौ बूथों की अलॉटमेंट रद करने संबंधी आदेश पर संपदा विभाग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस माह के अंत तक इनका आवंटन रद हो सकता है। उपायुक्त की ओर से प्रशासक के सलाहकार केके शर्मा को दी गई एक्शन टेकन रिपोर्ट में इस पूरे घोटाले में न को किसी राजनीतिज्ञ का नाम है और न ही संपदा विभाग के किसी अधिकारी का। जबकि पूर्व एडीसी पीएस शेरगिल ने अपने तबादले से पहले पिछले साल सौपी रिपोर्ट में कई बड़े राजनीतिज्ञों और संपदा विभाग के अधिकारियों का नाम लिया था।
शेरगिल की प्राथमिक जांच के बाद चंडीगढ़ के पूर्व उपायुक्त बृजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने जांच की थी। बाद में बृजेंद्र सिंह के अपने मूल राज्य हरियाणा लौटने के बाद उपायुक्त मोहम्मद शाईन ने जांच में तेजी लाते हुए एक्शन टेकन रिपोर्ट तैयार की। इन तीन सदस्यीय समिति ने अपनी जांच में यह पाया था कि ट्राइसिटी में कामर्शियल प्रापर्टी होने के बावजूद नौ लोगों को सेक्टर-41 की कृष्णा मार्केट में बूथ अलाट किए गए थे। प्रशासन को गमाडा और हुडा से इस संबंध में सुबूत मिले हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इन नौ लोगों के पास पहले से ट्राइसिटी में कामर्शियल प्रापर्टी थी। यह बूथ अलाटमेंट पॉलिसी का उल्लंघन था। ये बूथ 2002 से 2007 के बीच अलाट किए गए थे।
ध्यान रहे कि पूर्व उपायुक्त पीएस शेरगिल की रिपोर्ट के आधार पर संपदा विभाग ने 88 बूथ अलाटियों को इस साल जनवरी में नोटिस भेजे थे। उनके जवाब आने के बाद सुनवाई शुरू हुई थी। सेक्टर-41 की कृष्णा मार्केट और सेक्टर-22 की बिजवाड़ा मार्केट के दुकानदारों को 240 बूथ अलाट किए गए थे। इनमें से 88 बूथों की अलॉटमेंट फर्जी निकली थी।

2010 में प्रशासक ने दिए थे न्यायिक जांच के आदेश

चंडीगढ़ के प्रशासक शिवराज पाटिल ने मार्च 2010 में शिकायतें मिलने के बाद न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। जांच तत्कालीन एडीसी पीएस शेरगिल ने की। लगभग एक साल जांच करने के बाद शेरगिल ने फरवरी, 2011 में रिपोर्ट ऐसे समय पर सौंपी जब उनका मूल राज्य पंजाब वापस जाना तय था। शेरगिल ने इस पूरे घोटाले की सीबीआई जांच कराने को भी कहा था।

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