बिना पॉवर दी थी एडवाइजर ने अधिग्रहण को मंजूरी

Chandigarh Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। आईटी पार्क फेज तीन की जमीन अधिग्रहण के नोटीफिकेशन को मंजूरी यूटी प्रशासक के एडवाइजर ने दी थी। यूटी प्रशासक के एडवाइजर जमीन अधिग्रहण की मंजूरी नहीं दे सकते। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि एडवाइजर के पास भूमि अधिग्रहण को मंजूरी देने की पॉवर ही नहीं होती। आईटी पार्क फेज तीन की जमीन अधिग्रहण को रद किए जाने के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जमीन अधिग्रहण करके यूटी प्रशासन प्राइवेट डेवलपर्स को फायदा पहुुंचाना चाहता था।
सुप्रीमकोर्ट के फैसले के मुताबिक यूटी के वित्त सचिव के निर्देश पर लैंड एक्यूजीशन अधिकारी ने 27 जून 2006 को 104.83 एकड़ जमीन को अधिग्रहित करने के लिए नोटीफिकेशन कराया। इसे एडवाइजर ने उसी दिन मंजूरी भी दे दी। इसके बाद 2 अगस्त 2006 को एक और नोटीफिकेशन जारी किया गया। इसके तहत 167.50 एकड़ जमीन को अधिग्रहित किया जाना था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले मेें स्पष्ट किया है कि प्रशासक के सलाहकार के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं होता है कि वह जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को शुरू करने की मंजूरी दे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एडवाइजर उपयुक्त सरकार (एप्रोप्रिएट गवर्नमेंट) की क्षमताओं या शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकता है। यही नहीं प्रशासक के सलाहकार लैंड एक्यूजीशन अफसर की संस्तुति पर सांकेतिक रूप से भी जमीन अधिग्रहण की मंजूरी नहीं दे सकते हैं।

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