करोड़ों के काम पास, सिरे चढ़ा नहीं कोई

Chandigarh Updated Fri, 05 Oct 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। नगर निगम ने 9 माह में करीब 150 करोड़ के विकास कार्यों के प्रस्ताव तो पास किए, लेकिन इनमें से 10 प्रतिशत भी सिरे नहीं चढ़ पाए हैं। नौ माह में कई काम तो शुरू भी नहीं हो पाए हैं। शहर मेें लोगों की समस्याएं जस की तस खड़ी हैं, वहीं पार्षदों और अधिकारियों को अपने झगड़ाें से ही फुर्सत नहीं है।

ये काम नहीं हो पाए शुरू
01 करोड़ 40 लाख रुपये से सेक्टर-29 ए और बी में ओएफसी और प्रेस कालोनी में इंटरलॉकिंग पेवर ब्लाक लगने हैं
01 करोड़ 36 लाख 57 हजार रुपये की लागत से सरोवर पथ की वी-3 रोड़ की कारपेटिंग, इस समय जगह-जगह गड्ढे पड़े हुए हैं
50.11 लाख रुपये से मनीमाजरा की पाकेट नंबर-7 में शिवालिक गार्डन के चारों तरफ की रोड की कारपेटिंग
01 करोड़ 22 लाख 67 हजार रुपये से हिमालय मार्ग और उतर मार्ग से मध्य मार्ग की विभाजक सड़क की कारपेटिंग
1 करोड़ 36 लाख 43 हजार रुपये से सेक्टर-2-3 और 10-11 की विभाजक सड़क की कारपेटिंग
15 करोड़ 48 लाख रुपये से सेक्टर-52 के वाटर वर्कर्स को अपग्रेड करना। इससे दक्षिणी सेक्टर के तीसरे फेज के सेक्टरों के लोगों की पानी की किल्लत दूर होगी
83.40 लाख रुपये से सेक्टर-56 की पुनर्वास कालोनी में पेवर ब्लाक लगाना
3 करोड़ 7 लाख रुपये से सेक्टर-17 ए और बी एरिया का विकास करना
30.78 लाख रुपये से सेक्टर-21 में मकान नंबर-3246 के सामने बनी ग्रीन बेल्ट में जॉगिंग ट्रैक बनाना
23 करोड़ रुपये से नगर निगम की अपनी इमारत को बहुमंजिला बनाना
सेक्टर-17 की दो प्रमुख पेड पार्किंगों को आटोमेटिक करना

लंबी टेंडर प्रक्रिया से अटक रहे काम
शहर में अभी अधिकतर विकास के काम ऐसे चल रहे हैं जो पिछले कार्यकाल में पास हुए। अधिकतर काम इसलिए लटक रहे हैं क्योंकि टेंडर प्रक्रिया का कार्यकाल काफी लंबा है। इसमें सुधार के लिए पालिसी गठित करनी की जरूरत है। इस पालिसी पर सभी पार्षदों की राय एकजुट नहीं हो पा रही है।

पार्षदों की लड़ाई में आम आदमी का नुकसान
सेक्टर-15 की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा का कहना है कि पार्षदों और अधिकारियों की लड़ाई में नुकसान सिर्फ आम लोगों का ही है। पांच साल में शहर के हाथ कुछ नहीं लगा है।
व्यापार मंडल के मुख्य प्रवक्ता दिवाकर सहूजा का कहना है कि पिछले 10 साल में कोई बड़ा प्रोजेक्ट शहर को नहीं मिला है। विकास के नाम पर सिर्फ पेवर ब्लाक धड़ाधड़ लगे हैं।
सेक्टर-27 डी की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन अध्यक्ष शिखा निझावन का कहना है कि आवारा कुत्तों और बंदरों की दिक्कत बढ़ती जा रही है।
मौलीजागरां के पूर्व पार्षद अनिल दूबे का कहना है कि वर्तमान कार्यकाल में नए प्रोजेक्ट तो क्या लागू करने थे, पिछले कार्यकाल में पास की हुई थड़ा मार्केट का प्रस्ताव खारिज कर दिया।

इस ओर भी ध्यान दें
रिहायशी इलाकों की अंदरूनी सड़कों की हालत खस्ता है। जगह-जगह गड्ढे पड़े हैं।
शहरवासी पार्किंग की दिक्कत दूर करने के लिए कम्यूनिटी पार्किंग की मांग कर रहे हैं
प्राइमरी स्कूलों और डिस्पेंसरियों की खस्ता हालत है

वर्जन
मल्टीलेवल पार्किंग का प्रस्ताव काफी लंबे समय से अटका हुआ था, जिसके नक्शे भी पास करवाए गए हैं। जल्द ही शहर के सबसे बड़े प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य शुरू होने वाला है। अधिकारियों को इस साल पास हुए कामों को तेजी से करने के निर्देश दिए गए हैं। पिछले कई टेंडरों में देखा गया कि ठेकेदार सामने नहीं आ रहे हैं, इसलिए निर्माण सामग्री महंगी होने के कारण ठेके के रेटों में भी इजाफा किया गया है।
- राज बाला मलिक, मेयर, नगर निगम

प्रस्ताव पास होने से लेकर टेंडर प्रक्रिया तक समय लगता है। मानसून समाप्त हो गया है। ऐसे में अब जल्द ही शहर की कई प्रमुख सड़कों की कारपेटिंग का काम शुरू होने वाला है।
- एसएस बिद्दा, चीफ इंजीनियर।

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