प्रशासक के आश्वासन के बावजूद महीनों से कार्रवाई का इंतजार कर रहे शिकायतकर्ता

Chandigarh Updated Wed, 03 Oct 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक शिवराज पाटिल के जन सुनवाई सत्र में जहां लोगों को धक्के मिल रहे हैं, वहीं उनकी शिकायतों पर महीनों बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती। दर्जनों ऐसे केस हैं, जब प्रशासक ने शिकायत स्वीकार करते हुए अधिकारियों को कार्रवाई करने के आदेश दिए, लेकिन उनका नतीजा जीरो रहा। शायद अधिकारी ही प्रशासक के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लेते हैं।
सोमवार को जनता दरबार में शिकायतकर्ताओं के हंगामे ने यह स्पष्ट कर दिया कि लोगों के सब्र का बांध टूट चुका है। लोगों का कहना है कि अगर प्रशासक के दरबार में ही गुहार लगाने के बाद उनकी समस्या पर कोई कार्रवाई नहीं होती है तो वे अब कहां जाएं?

केस नंबर एक
बेटी के हत्यारों को पकड़वाने के लिए खा रहे धक्के
लगभग एक साल पहले 20 अक्तूबर, 2011 को सेक्टर-38 निवासी राजवीर सिंह अपनी बेटी नेहा अहलावत के हत्यारों को जल्द से जल्द पकड़ने की गुहार लगाने के लिए प्रशासक के पास गए। प्रशासक ने उन्हें गंभीरता से सुना था और डीजीपी पीके श्रीवास्तव से दोबारा से इस मामले की जांच शुरू कर कातिलों को पकड़ने को कहा था। साल बीत गया। आज भी राजवीर सिंह को इंसाफ नहीं मिल सका है और पुलिस नेहा के हत्यारों को नहीं पकड़ सकी है।

केस नंबर दो
हल्लोमाजरा में छह माह में भी नहीं बदले हालात
वार्ड नंबर 23 की पार्षद जन्नत जहां उल हक मार्च में हल्लोमाजरा स्थित दीप कांपलेक्स के लोगों की समस्याओं को लेकर प्रशासक से मिली थीं। उनका कहना था कि दीप कांपलेक्स के लोगों को बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिलती हैं। प्रशासक ने इसे बहुत गंभीरता से लिया और अधिकारियों से इस मामले में तुरंत कार्रवाई करने को कहा। छह माह बीत जाने के बाद भी स्थिति वहीं की वहीं है। पार्षद ने कहा कि वे एक माह तक अधिकारियों की कार्रवाई का और इंतजार करेगी, उसके बाद जनआंदोलन किया जाएगा।

केस नंबर तीन
हमलावरों को पकड़ नहीं सकी पुलिस
मार्च में ही न्यूज पेपर हॉकर देविंदर कुमार प्रशासक से मिले थे। उनकी शिकायत थी कि पिछले साल नवंबर में उनकी पत्नी पर हमला हुआ था। पुलिस ने केस तो दर्ज किया, लेकिन हमलावरों को नहीं पकड़ा। प्रशासक ने डीजीपी से इस मामले में कार्रवाई करने को कहा था। लेकिन, छह माह बीत जाने के बाद देविंदर सिंह अपनी पत्नी पर हमला करने वालों की गिरफ्तार होने का इंतजार कर रहे हैं।

हर माह एक्शन टेकन रिपोर्ट लें प्रशासक
यह सिर्फ तीन उदाहरण हैं। पिछले एक साल में प्रशासक से जन सुनवाई सत्र में मिलने वाले अधिकतर लोगों का यही कहना है कि उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि जब तक प्रशासक हर माह एक्शन टेकन रिपोर्ट नहीं मांगेंगे तब तक प्रशासन के अधिकारी इस सत्र को गंभीरता से नहीं लेंगे।

रिमाइंडर पर भी नहीं मिली रिपोर्ट
छह माह पहले खुले दरबार में प्रशासक के साथ फासवेक संगठन के पदाधिकारियों ने कई मुद्दे पर बातचीत की, लेकिन आज तक उसकी एक्शन टेकन रिपोर्ट नहीं आई है। इसके लिए रिमाइंडर भी दिया गया था।
- पीसी सांघी, अध्यक्ष, फासवेक




जैन ने कहा, पाटिल माफी मांगे
चंडीगढ़ के पूर्व सांसद एवं भाजपा के कानूनी एवं संसदीय कार्य प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय प्रभारी सत्यपाल जैन ने सोमवार को यूटी सचिवालय में दंपति के साथ की गई बदसलूकी पर प्रशासक शिवराज पाटिल से माफी मांगने की मांग की है। जैन ने कहा कि प्रशासक को यह समझना चाहिए कि वे लोकतंत्र में जनता के सेवक हैं, न कि तानाशाह। जैन ने कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक न सलाहकार परिषद की बैठक करते हैं, न समय पर अपना जनता दरबार लगाते हैं।


बहाल हो चीफ कमिश्नर का पद
चंडीगढ़। न्याय नहीं मिलने से प्रशासक के दरबार से शहरवासियों का मोह भंग होता जा रहा है। अब संगठन तीन नवंबर के प्रस्तावित गृह मंत्री के दौरे पर प्रशासक को हटाने की मांग कर सकते हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष बीबी बहल का कहना है कि अब शहर को प्रशासक की जरूरत नहीं है। केंद्र सरकार से मांग की गई है कि जब डिस्टर्ब एरिया का टैग हट चुका है तो चीफ कमिश्नर का पद बहाल किया जाए।
पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन का कहना है कि तब तक शहरवासियों को पूर्ण लोकतंत्र नहीं मिल सकता, जब तक चीफ कमिश्नर का पद बहाल न हो जाए।
व्यापार मंडल के मुख्य संरक्षक दिवाकर सहूजा का कहना है कि अशांत एरिए का टैग हटाने को लेकर कोर्ट के निर्णय के बावजूद प्रशासक पद छोड़ने के लिए राजी नहीं हैं।
सेक्टर- 47 डी की रेजीडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह का कहना है कि चीफ कमिश्नर का पद बहाल होने से ही लोगों की दिक्कतें दूर हो सकती हैं। आम लोग आसानी से चीफ कमिश्नर से मिल सकेंगे।

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