सलाहकार और गृह सचिव से मिलकर नगर निगम की मेयर और पार्षदों ने की मांग

Chandigarh Updated Tue, 02 Oct 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। नगर निगम की मेयर सहित पार्षदों ने मांग की है कि कार्रवाई का बहिष्कार करने वाले अधिकारियों को उनके मूल कैडर में वापस भेज दिया जाए। यह प्रतिनिधिमंडल सोमवार को प्रशासक के सलाहकार केके शर्मा और गृह सचिव अनिल कुमार से मिलने पहुंचा था। उधर, बहिष्कार करने वाले अधिकारियों ने भी पिछले दिनों यही मांग की थी। सलाहकार केके शर्मा ने कहा कि बुधवार को अब अधिकारियों को यहां पर बुलाकर उनका पक्ष पूछा जाएगा। उसके बाद ही कार्रवाई करने का निर्णय लिया जाएगा।
सलाहकार से मिलने का निर्णय भी पार्षदों ने दो घंटे की चर्चा करने के बाद लिया। दोपहर 1 बजे मेयर ने सभी पार्षदों के साथ बैठक की। सलाहकार के साथ हुई बैठक में पार्षदों ने अधिकारियों के व्यवहार पर जमकर गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा कि अभी तक इस साल के 9 माह में करोड़ों रुपये के विकास के प्रस्ताव पास हुए, लेकिन उन पर अधिकतर पर काम भी शुरू नहीं हो पाया है। इसके लिए अधिकारी ही जिम्मेवार हैं।
बैठक में सलाहकार ने पूछा कि मनोनीत पार्षद सुरेंद्र बग्गा कौन हैं? उन्होंने पार्षदों को कहा कि उन्हें पता चला है कि बग्गा और मनोनीत पार्षद अमृता तिवारी के अपशब्द कहने से अधिकारी नाराज होकर बहिष्कार करके गए हैं। इस बैठक में बग्गा शहर में उपस्थित नहीं होने के कारण नहीं आ पाए। पार्षदों ने सलाहकार को सदन की वीडियोग्राफी देखने की भी राय दी। पार्षदों ने कहा कि अधिकारियों को सुनिश्चित किया जाए, ताकि अगली बार ऐसी घटना न हो।
पार्षदों ने कहा कि अधिकारियों ने बहिष्कार का कदम उठाकर सर्विस रूल्स के खिलाफ काम किया। उन्होंने अनुशासन तोड़ा है ऐसे में अधिकारियों के खिलाफ हर हालत में कार्रवाई की जाए। पार्षदों ने कहा कि एक साल में यह दूसरी बार बहिष्कार हो चुका है। 9 माह के भीतर कई घोटालों का पर्दाफाश किया गया है। इसे अधिकारी बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं।

क्या जरूरत है अधिकारियों की
बैठक में गृह सचिव अनिल कुमार ने कहा कि निचले स्तर के अधिकारियों की सदन की बैठक में शामिल होने की क्या जरूरत है? विधानसभा और संसद की कार्रवाई में भी निचले स्तर के अधिकारी भाग नहीं लेते हैं। कमिश्नर के भाग लेेने पर ही काम चल सकता है। बैठक में पार्षदों को चाय-पानी भी नहीं पूछा गया। इस बात को लेकर चंद पार्षद नाराज हैं। मेयर द्वारा सलाहकार से दिन में दो बार फोन करके मिलने के लिए समय मांगा, लेकिन सलाहकार ने शाम 5 बजे तक व्यस्त होने केकारण कोई समय नहीं दिया। इसके बाद पार्षद खुद ही सचिवालय पहुंच गए। मिलने से पहले मेयर ने केंद्रीय मंत्री पवन बंसल से भी फोन पर बात की।

गंदे पानी का मामला उठा
सलाहकार के समक्ष भाजपा पार्षदों ने गंदे पानी का मामला उठाया, जबकि भाजपा पार्षद अरुण सूद ने ट्यूबवेल पर लगे क्लोरिनेटर का मुद्दा उठाया। इस मुद्दे को लेकर ही अधिकारियों ने बहिष्कार किया था। सलाहकार के के शर्मा ने कहा कि मौलीजागरा में हुई गंदे पानी की सप्लाई को लेकर अतिरिक्त उपायुक्त की रिपोर्ट आ चुकी है और इस पर कार्रवाई जरूर होगी। उन्होंने जोशी को भी आश्वासन दिया कि क्लोरिनेटर की अलाटमेंट को लेकर जो गड़बड़ी है उस पर भी कार्रवाई की जाएगी।

बहिष्कार नहीं किया
जब पार्षद बैठक समाप्त करके वापस लौटने लगे तो सलाहकार केके शर्मा ने मौके पर मौजूद आधा दर्जन पार्षदों को कहा कि उन्हें बताया गया है कि नगर निगम के अधिकारियों ने बहिष्कार नहीं किया था। वह तो पार्षदों के व्यवहार से तंग होकर कुछ देर के लिए बाहर चले गए थे। उसी समय लंच की घोषणा हो गई थी। पार्षदों ने कहा कि अधिकारी हर बात को लेकर ब्लैकमेलिंग करते है। नए अधिकारियों के आने तक भी नगर निगम का काम चल सकता है।

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