बवाल न टला तो प्रशासन नियुक्त करेगा आबजर्वर!

Chandigarh Updated Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। अगर हंगामे के कारण शहरवासियों के विकास के काम प्रभावित होते रहे और नगर निगम अपना रोल अदा करने में असफल रहता है तो प्रशासन को मजबूरी में नगर निगम में आबजर्वर नियुक्त करना पड़ेगा। पंजाब म्युनिसिपल एक्ट में ऐसा प्रावाधान है। आबजर्वर सदन में पूरी कार्रवाई को देखकर पूरी रिपोर्ट प्रशासन के आला अधिकारी को देगा। पूर्व मेयर भी कुछ इसी तरह की बात कह रहे हैं।
इस साल अब तक के 8 माह में हर सदन की बैठक में हंगामा हुआ है, जिससे शहर के विकास के काम प्रभावित हुए हैं। 8 माह में दो बार हंगामे के कारण बैठक स्थगित करनी पड़ी, जिससे विकास के प्रस्ताव पास नहीं हो सके। सूत्रों का कहना है कि प्रशासन ने इस ओर भी कदम उठाने के प्रस्ताव पर विचार करना शुरू कर दिया है।

हर बार हुई शिकायत
पिछले साल से नगर निगम में तनातनी ज्यादा बढ़ गई है। इस साल पहले सब कमेटियों के गठन को लेकर प्रशासन के पास शिकायत पहुंची। उसके बाद थड़ा मार्केट के प्रस्ताव खारिज करने के बाद भाजपा ने सलाहकार से शिकायत की। इससे पहले क्षमता से अधिक पास छपवाने के मामले में मेयर और कांग्रेस पार्षदों की शिकायत प्रशासन तक गई।

नुकसान तो शहरवासियों का है
सेक्टर-18 की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील चोपड़ा का कहना है कि अधिकारियों और पार्षदों की राजनीति में नुकसान सिर्फ शहर का हो रहा है। उनका कहना है कि इस समय नगर निगम में राजनीति हावी है, इसलिए अब प्रशासन को ही सदन की बैठक में हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि शहरवासियों का नुकसान न हो।

मेयर भी प्रशासन को सलाह दे चुकी है
प्रशासन और नगर निगम के बीच हुई को-आर्डिनेशन कमेटी की बैठक में मेयर द्वारा भी प्रशासन के सलाहकार और स्थानीय सचिव को दो बार सलाह दे चुकी है, वह खुद किसी सदन की बैठक में शामिल होकर देखें कि किस तरह से विपक्षी पार्षदों द्वारा हंगामा किया जाता है। ऐसा मेयर द्वारा तब कहा गया था, जब प्रशासन की ओर से सदन में हाउस टैक्स का प्रस्ताव पास करवाने के लिए कहा गया था।

आज फिर होगा शिकायतों का दौर
शनिवार, रविवार को अधिकारियों और पार्षदों के बीच समझौता होने की उम्मीद थी जो नहीं हुआ। ऐसे में सोमवार को तनातनी इसलिए और बढ़ जाएगी, क्योंकि शिकायतों का दौर शुरू हो जाएगा। पार्षदाें की ओर से सलाहकार को शिकायत देने की रणनीति है, जबकि कमिश्नर की ओर से भी मामले की रिपोर्ट प्रशासन को देनी है। अधिकारियों द्वारा मांगी गई एक माह की छुट्टी का निर्णय भी लिया जाएगा।

इनकी सुनिए
पूर्व मेयर प्रदीप छाबड़ा का कहना है कि अधिकारियों को बहिष्कार नहीं करना चाहिए था। प्रशासन को इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए कहा जाएगा। पूर्व मेयर सुभाष चावला का कहना है कि इस साल सदन में ज्यादा शोर शराबा हो रहा है। इसके लिए एक हद तक विपक्ष भी जिम्मेवार है। एक्ट के अनुसार प्रशासन आब्जर्वर नियुक्त कर सकता है।
भाजपा पार्षद अरुण सूद का कहना है कि ऐसा लग रहा है जांच से बचने के लिए अधिकारी सदन की बैठक कर छोड़ कर चले गए हैं। शहर की समस्याओं को दूर करना अधिकारियों की जिम्मेवारी है। वह अपनी जिम्मेवारी से भाग नहीं सकते हैं।

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