कन्वर्जन चार्ज की अदायगी नहीं, पांच हजार करोड़ का फटका

Chandigarh Updated Sat, 29 Sep 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। शहर के इंडस्ट्रियल एरिया में गैरकानूनी तरीके से वूल यूनिटों के लिए सब्सिडाइज्ड प्लाटों के कमर्शियल शोरूमों में ट्रांसफर करने का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंचा है। दिल्ली निवासी भूपिंद्र चतुर्वेदी एवं अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कोर्ट से आग्रह किया है कि बिना कन्वर्जन चार्ज की अदायगी से इन प्लांटाें को ट्रांसफर किया जा रहा है, जिससे राजस्व को करीब पांच हजार करोड़ का चपत लग रही है। चीफ जस्टिस एके सीकरी एवं जस्टिस राकेश कुमार जैन पर आधारित खंडपीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए यथास्थिति बरकरार रखने के निर्देश जारी कर दिए। साथ ही, हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन और एस्टेट आफिस, डीसी और दो कंपनियों को भी नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया। मामले की आगामी सुनवाई 11 जनवरी के लिए निर्धारित की गई है।
हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका में चंडीगढ़ प्रशासन, स्टेट आफिस, डीसी, तारा इंडस्ट्रीज लिमिटेड, मुंबई और एपीएस इंटरनेशनल वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, मुंबई को प्रतिवादी बनाया गया है। चंडीगढ़ में वूल प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने सरकार ने मोडेला वुडन लिमिटेड (मोडेला ग्रुप) को एक मिलियन स्क्वेयर फुट सब्सिडाइज्ड तरीके से भूमि अलॉट की थी। कंपनी को अलॉट किए गए लाइसेंस में यह शर्त रखी थी कि यह प्लॉट सिर्फ वूल प्रोसेसिंग यूनिट को स्थापित करने के लिए उपयोग में लाए जाएंगे। इनका प्रयोग दूसरी किसी इंडस्ट्री या कमर्शियल यूनिट को स्थापित करने के लिए नहीं होगा। साथ ही, इन प्लाटों की ट्रांसफर पर भी पूरी रोक रहेगी। याचिका में कहा गया है कि कंपनी को अलाट की गई उस पूरी जमीन को 100 कमर्शियल प्लाट में ट्रांसफर और विभाजित कर दी गई है, जिनमें कारों के शोरूम और कई अन्य व्यवसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल में लाया जा रहा है। 2004 से लेकर 2012 तक ऐसा हुआ, लेकिन चंडीगढ़ एस्टेट आफिस सरकार के अधिकार को इस्तेमाल करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। इस संबंध में 28 जनवरी 2012 को सभी प्रशासनिक अधिकारियों को रिप्रेंजेंटेशन दी गई, लेकिन कोई भी जवाब नहीं मिला। याचिका में कहा गया है कि इस जमीन के दुरुपयोग के तहत प्रति स्क्वेयर फीट 500 रुपये प्रतिमाह बनता है। इसके तहत पूरी जमीन पर प्रतिमाह 50 करोड़ रुपये और प्रतिवर्ष 600 करोड़ रुपये की राशि बनती है।

यूं हुआ ट्रांसफर का खेल
1992 में मोडेला वुडन लिमिटेड मेसर्स ने यह प्लॉट तारा इंडस्ट्रीज को ट्रांसफर किए जबकि 2004 में तारा इंडस्टीज ने आगे यह प्लॉट एपीएस इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर कर दिए।

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