बैक इंजन वाली लो फ्लोर बसों ने दिया घाटा

Chandigarh Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। सीटीयू बसों में पीछे इंजन वाली बसों ने प्रबंधन को सिर्फ घाटा ही दिया है। हर महीने इन बसों की देखरेख और पार्ट्स पर लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं, जबकि फ्रंट साइड इंजन वाली बसों पर होने वाला खर्च इससे आधा है।
सीटीयू सूत्रों के अनुसार शहर में पीछे साइड इंजन वाली लो फ्लोर की 102 बसें चल रही हैं। इन बसों के स्पेयर पार्ट्स पर हर माह औसतन आठ हजार रुपये खर्च हो रहा है, जबकि टायर ट्यूब और ऑयल का खर्च अलग है। वहीं फ्रंट साइड इंजन वाली बसों पर हर महीना होने वाला खर्च 4 हजार रुपये है। शहर में फ्रंट इंजन वाली 239 बसें चल रही हैं। ऐसे में सीटीयू प्रशासन को एक साल में करीब 50 लाख रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है।
सीटीयू के मैकेनिक अशोक कुमार का कहना है कि फ्रंट इंजन में ड्राइवर को किसी भी प्रकार की कमी तुरंत पता चल जाती है, जबकि पीछे इंजन वाली बसों में कमी का पता नहीं चलता। इस बस का लीवर बॉक्स ड्राइवर से करीब 34 फीट की दूरी पर होता है। बारिश में क्ले भर जाता है। इन बसों में 40 ऐसी बसें हैं जो हर महीना गियर ले रही हैं।
सीटीयू जीएम अमरीक सिंह का कहना है कि पीछे इंजन वाली बसों के स्पेयर पार्ट पर फ्रंट साइड के इंजन की अपेक्षा अधिक खर्च हो रहा है।

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