विश्व पटल पर हिंदी को सम्मान दिलाने का संकल्प

Chandigarh Updated Sun, 23 Sep 2012 12:00 PM IST
जोहान्सबर्ग से उदय कुमार
‘भाषा रेत की तरह है, जिसे मुट्ठी में संभाल कर नहीं रखें तो फिसल जाएगी।’ इस उद्बोधन के साथ शनिवार को यहां नौवें विश्व हिंदी सम्मेलन की शुरुआत हुई। हिंदी को विश्व पटल के साथ-साथ अपने देश में भी सम्मान दिलाने का संकल्प इस सम्मलेन के प्रारंभ में ही उभरकर सामने आया। मारीशस का हिंदी प्रेम और दक्षिण अफ्रीका के हिंदी सौहार्द्र के बीच अपनी भाषा के अस्तित्व की रक्षा की चिंता भी सामने आई। महात्मा गांधी के सत्याग्रह की जन्मभूमि जोहान्सबर्ग में 30 से अधिक देशों के करीब 700 हिंदी प्रेमियों के इस मेले में अगले तीन दिन तक अलग-अलग सत्रों में इन्हीं बिंदुओं पर खास तौर पर मंथन होगा।
यहां गांधीग्राम में सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान विदेश राज्यमंत्री परनीत कौर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनने का हिंदी का दावा बनता है। बाद में पत्रकारों के सवालों के दौरान भी उन्होंने कहा कि भारत सरकार इसके लिए निश्चित दिशा तय कर प्रयास करेगी और इसमें कोई आर्थिक बाधा नहीं आएगी।

...जैसे अपने देश में, अपनों के बीच हैं हम
दक्षिण अफ्रीकाके खूबसूरत शहर जोहान्सबर्ग के वासंती मौसम में रिमझिम फुहारों के बीच शुरू हुए हिंदी के इस महाकुंभ में ऐसा लगता है कि हम अपने ही देश में अपनों के बीच हों। भारत से यहां आए प्रतिनिधियों में हिंदी जगत की कई बड़ी हस्तियां यहां हिंदी के अस्तित्व पर चिंतन कर रही हैं। इसके साथ ही सत्यव्रत चतुर्वेदी, मणिशंकर अय्यर, रघुवंश प्रसाद सिंह जैसे कई सांसद और जनप्रतिनिधि भी इस मंथन का हिस्सा हैं। इस सम्मलेन में महिला प्रतिभागियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति ने हिंदी को सम्मान दिलाने के इस अभियान को और मजबूती दी है।
दिल में उतर गया मुक्तेश्वर का हिंदी प्रेम
विश्व हिंदी सम्मलेन के शुभारंभ अवसर पर सबसे ज्यादा तालियां मॉरीशस के कला एवं संस्कृति मंत्री मुक्तेश्वर चुनी को मिलीं। बॉलीवुड फिल्में और टीवी सीरियलों को देखकर हिंदी सीखने की जानकारी देते हुए उन्होंने टूटी फूटी हिंदी में बोलने की अनुमति मांगी। लेकिन, हिंदीभाषियों की तरह ही उनका हिंदी उद्गार खचाखच भरे नेल्सन मंडेला सभागार में लगातार तालियां बटोरता रहा। उनका हिंदी प्रेम हाल में मौजूद लोगों के दिल में उतर गया।
यहां दक्षिण अफ्रीका के हिंदी शिक्षा संघ की अध्यक्ष मालती रामबली ने भावपूर्ण ढंग से हिंदी के सम्मान और उसके अस्तित्व की रक्षा का मुद्दा उठाया। दक्षिण अफ्रीका के वित्त मंत्री प्रवीन गोर्धन ने करीब डेढ़ सौ साल पहले दक्षिण अफ्रीका आए हिंदी भाषियों से नाता जोड़ते हुए कहा की उनका देश यहां बोली जाने वाली हर भाषा का सम्मान करता है।
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सम्मेलन के केंद्र में रहे गांधीजी
भारत के सत्यव्रत चतुर्वेदी हों या दक्षिण अफ्रीका के प्रवीन गोर्धन, सम्मेलन में हर वक्ता के उद्बोधन के केंद्र में महात्मा गांधी ही रहे। इस अवसर पर गांधीजी की प्रपौत्री इला गांधी ने हिंदी में न बोल पाने के लिए बार-बार क्षमा मांगी, लेकिन हिंदी को व्यापक स्तर पर मिल रहे सम्मान के लिए उन्होंने प्रसन्नता भी जताई। इस मौके पर हिंदी सम्मेलन की स्मारिका गगनांचल का विमोचन विदेश राज्यमंत्री परनीत कौर, दक्षिण अफ्रीका के वित्त मंत्री प्रवीन गोर्धन और मारीशस के संस्कृति मंत्री मुक्तेश्वर चुनी ने किया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने भी विश्व हिंदी सम्मेलन की सफलता के लिए अपना शुभकामना संदेश भेजा है।

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