सेंट्रल क्लब को दो दिन की मोहलत

Chandigarh Updated Sat, 22 Sep 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। सेक्टर-9 के प्रतिष्ठित सेंट्रल क्लब पर बंद होने की तलवार लटक गई है। यदि दो दिन में डेढ़ करोड़ रुपये बकाया किराया जमा नहीं कराया गया तो 1100 बुजुर्गों का यह क्लब उनसे छिन जाएगा। शुक्रवार शाम को भी क्लब को बंद कराने आई प्रशासन और पुलिस टीम के साथ बुजुर्गों की तीन घंटे तक जमकर बहस हुई। इसके बाद उन्हें दो दिन की मोहलत दी गई। क्लब के पदाधिकारियों का कहना है कि जिला अदालत के आदेश के बाद क्लब को नोटिस देकर खाली करने का समय देना चाहिए था। शनिवार को क्लब ने आपातकालीन वार्षिक बैठक बुलाई है। क्लब के पदाधिकारियों ने आश्वासन दिया कि वे या तो सोमवार तक जो भी बकाया राशि है उसे जमा करा देंगे या क्लब को खाली कर दिया जाएगा।
शुक्रवार को लगभग तीन बजे उपायुक्त और संपदा अधिकारी मोहम्मद शाइन ने क्लब को खाली करने का आर्डर निकाला और इसके लिए उन्होंने एडीसी महावीर कौशिक को अधिकृत किया। शाम को लगभग चार बजे पुलिस क्लब में पहुंच गई और उसके कुछ देर बाद ही एडीसी महावीर कौशिक, ज्वाइंट सेक्रेटरी (एस्टेट) एसके सेतिया और सहायक संपदा अधिकारी राहुल गुप्ता भी आ गए। संपदा विभाग की टीम सिर्फ ट्रक में क्लब का कूलर ही रख पाई थी कि क्लब के सदस्यों ने विरोध करना शुरू कर दिया। इनमें अधिकतर सदस्य 70 से 90 साल के थे।

बुजुर्ग हुए मायूस
संपदा विभाग के अधिकारी जब क्लब को खाली कराने पहुंचे उस समय वहां कई सदस्य मौजूद थे, इनमें कई महिलाएं भी थी। क्लब के 1100 सदस्य हैं, जिनमें से अधिकतर 70 से 80 साल के हैं। महिलाओं ने कहा कि यह क्लब उनकी लाइफ है, अगर क्लब बंद हो गया तो उनके लिए समय काटना मुश्किल हो जाएगा। 50 साल से क्लब के सदस्य आईपी पुरी, डीबी सिंह, एएस मेंहदीरत्ता और एसके कक्कड़ ने कहा कि प्रशासन को पहले नोटिस देना चाहिए था।


2 रुपये से बढ़कर सवा लाख रुपये महीना हुआ किराया
1961 में 25 रुपये प्रति वर्ष की लीज पर दिया
1974 से 1982 तक किराया 975 रुपये प्रति वर्ष
1982 से 1989 तक 1267 रुपये प्रति वर्ष
अप्रैल, 1989 से 19009 रुपये प्रति माह
मार्च, 2003 से 25567 रुपये प्रति माह
अप्रैल, 2004 से 131947 रुपये प्रति माह
(क्लब ने छह-सात साल से किराया नहीं दिया। इससे पहले भी नियमित तौर पर किराया नहीं दिया गया)

पहले भी दिया गया था नोटिस
वर्ष 2004 में क्लब को रिज्यूम करने का नोटिस जारी हुआ था। तब तक क्लब पर 31 लाख 73 हजार 781 रुपये बकाया थे। क्लब ने इस आर्डर के खिलाफ मुख्य प्रशासक के पास याचिका दायर की। अगस्त, 2011 में संपदा अधिकारी ने 15 दिन के अंदर क्लब को खाली करने का आदेश दिया। इस आर्डर के खिलाफ क्लब ने जिला अदालत में याचिका दायर की और अदालत ने इस आदेश पर रोक लगा दी। 13 सितंबर, 2012 को अदालत ने संपदा अधिकारी के आर्डर को सही ठहरा दिया, जिस पर शुक्रवार को कार्रवाई हुई।

कोट
क्लब के पदाधिकारियों ने दो दिन का समय मांगा है। हमने उनसे लिखित में देने को कहा है। इस पर सीनियर अधिकारियों से बात करेंगे।
- एसके सेतिया, ज्वाइंट सेक्रेट्री (एस्टेट)

हम जो भी कार्रवाई कर रहे हैं, वह कानून के अनुसार है। हम क्लब के बुजुर्ग सदस्यों को परेशान नहीं करना चाहते थे। इसलिए उन्हें समय दिया है।
- राहुल गुप्ता, सहायक संपदा अधिकारी

प्रशासन से दो दिन का समय मांगा है। शनिवार को एजीएम बुलाई गई है। उसमें तय करेंगे कि आगे क्या करना है।
-विनोद तलवार, अध्यक्ष, सेंट्रल क्लब।

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