अब बहुत कुछ बदल जाएगा चंडीगढ़ में

Chandigarh Updated Thu, 20 Sep 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। करीब 28 साल से लागू चंडीगढ़ डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट के हटने से शहर में बहुत कुछ बदल जाएगा। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को इसकी अधिसूचना को रद कर दिया। शहर के लोगों और राजनीतिक दलों की यह मांग लंबे समय से चली आ रही थी। वैसे प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है। फिर भी अशांत क्षेत्र के ठप्पे से मुक्त होते ही पुलिस और प्रशासन के बहुत से अधिकारों में कटौती होगी।

प्रशासक की जगह हो सकता है चीफ कमिश्नर
संविधान की धारा 239 के तहत चंडीगढ़ डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट-1983 में चीफ कमिश्नर की जगह चंडीगढ़ के लिए प्रशासक के पद का प्रावधान किया गया। अब डिस्टर्ब एरिया की अधिसूचना हाईकोर्ट ने रद कर दी है तो चंडीगढ़ में प्रशासक की जगह फिर से चीफ कमिश्नर के पद को बहाल करने की उम्मीद भी बढ़ गई है। लंबे समय से शहर के लोग इस पद को बहाल करने की मांग कर रहे थे।

पुलिस पर असर
इस अधिसूचना के रद होने पर पुलिस को मिले कई विशेष अधिकार भी छिन जाएंगे। अभी पुलिस को यह विशेष अधिकार है कि सब इंस्पेक्टर की रैंक से ऊपर का कोई भी पुलिस अधिकारी शांति भंग की आशंका पर चेतावनी देकर फायरिंग करने का आदेश दे सकते हैं। यह अधिकार छिन जाएगा। साथ ही पुलिस को मिलने वाला अतिरिक्त बजट भी नहीं मिलेगा।

अफसरों पर असर
अभी बहुत से अधिकारी ऐसे हैं जिनकी पोस्टिंग चंडीगढ़ से बाहर है, लेकिन उन्हें चंडीगढ़ में सरकारी मकान और सुरक्षा मिली हुई है। कई रिटायर्ड आईएएस और आईपीएस अधिकारी भी सरकारी मकान और सुरक्षा का लाभ मात्र इसी एक्ट की वजह से ले रहे हैं। साथ ही डिस्टर्ब्ड एरिया को लेकर अधिसूचना वापस होने के बाद चंडीगढ़ में बड़े पदों पर कार्यरत कुछ अधिकारियों को विशेष भत्ते भी मिलने बंद हो जाएंगे और उनकी सुरक्षा में भी कटौती होगी।

पर्यटन बढ़ेगा
अशांत क्षेत्र का दर्जा होने की वजह से विदेशी पर्यटकों को यहां आने से पहले विशेष मंजूरी लेनी पड़ती है। उन्हें भी इसके अशांत क्षेत्र होने का डर रहता है। यह अधिसूचना वापस होने पर वे बिना हिचक चंडीगढ़ का रुख कर सकेंगे।


खाली होंगे बहुत से सरकारी मकान
अशांत क्षेत्र की अधिसूचना रद होने से शहर में बहुत से सरकारी मकान खाली होंगे। खासकर जिनमें बाहर पोस्टेड और सेवानिवृत अफसर मात्र इसी एक्ट की वजह से जमे हुए हैं। इससे नए आने वाले अफसरों को शहर में मकान की दिक्कत खत्म हो जाएगी।


कोट्स-हेडिंग के साथ
अप्रिय घटना की जिम्मेदारी कौन लेगा
यह पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला है और हाईकोर्ट के इस फैसले से हमें किसी तरह की दिक्कत नहीं है। यह फैसला हमें मंजूर है। चंडीगढ़ दो राज्यों की राजधानी है और यहां कई वीवीआईपी रहते हैं। कई तरह के खतरों का संदेह अभी कायम है और इसको लेकर हमारे पास रिपोर्ट भी समय-समय पर आती है। भविष्य में अगर कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
-शिवराज पाटिल, प्रशासक, चंडीगढ़
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जा सकते हैं सुप्रीम कोर्ट
हमारे पास अभी पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले की प्रति नहीं आई है। फैसले की प्रति आने के बाद ही हम सलाह कर यह तय करेंगे कि इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करनी है या नहीं? यह कहना गलत होगा कि इस एक्ट के लागू होने के बाद प्रशासन के अधिकारी किसी तरह का विशेष लाभ ले रहे हैं।
केके शर्मा, प्रशासक के सलाहकार

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