सैनिकों को बर्फ में रास्ता दिखाएगी सासे की छड़ी

Chandigarh Updated Fri, 31 Aug 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। स्नो एंड एवलांचे स्टडी एस्टेबलिशमेंट (सासे) ने एक ऐसी छड़ी तैयार की है जो सैनिकों को बर्फ में सुरक्षित रास्ता दिखाएगी। साथ ही यह इसकी भी जानकारी देगी कहां हिमस्खलन हो सकता है। सासे ने इसे एवलांच राड का नाम दिया है। बर्फीले इलाकों में तूफान और आपदा के बाद इस राड के जरिए खोजबीन में भी मदद ली जा सकेगी। एवलांच राड ट्रायल पर भेजी जा चुकी है। ट्रायल में फिट होने के बाद इसकी मैन्युफैक्चरिंग शुरू हो जाएगी।
चंडीगढ़ सेक्टर-37 स्थित हिमपरिसर के वैज्ञानिकों ने यह खास राड फौजियों को बर्फीले इलाकों में होने वाली समस्या की वजह से तैयार की है। सासे के निदेशक डा. अश्वघोष गंजू ने बताया कि यह राड फाइबर से तैयार की गई है। इसमें कई प्रकार के सेंसर का इस्तेमाल किया गया है। इसका वजन सिर्फ दो किलो है। इसे आसानी से पीठ पर लादा जा सकता है। इसका मदद से बर्फ की हार्डनेस और उसकी साफ्टनेस का पता लगाया जा सकेगा। राड में लगे जीपीएस सिस्टम के जरिए इलाके की सारी जानकारी स्क्रीन पर मिल सकेगी।

ये फायदा होगा फौजियों को
बर्फीले इलाकों में तैनात फौजी राड के जरिए यह पता लगा सकेंगे कि एवालांच की स्थिति क्या है। राड में यह सुविधा है कि यदि कहीं बर्फ हटानी है तो उसको हटा सकते हैं, यही नहीं, कोई मिसिंग हो तो उसका पता भी लगाया जा सकेगा।

ये है खासियत
जीपीएस सिस्टम-मैप दिखाएगा बर्फ में रास्ता।
सेंसर-बर्फ की हार्डनेस और साफ्टनेस बताएगा।
विक्टिम डिटेक्टर-आसानी से मिलेगी लोकेशन।
औजार : बर्फ को काटने और हटाने की व्यवस्था।
कीमत-करीब पचास हजार रुपये

ट्रायल पर राड
इंस्ट्रूमेंटल एवलांच राड-35
नान इंस्ट्रूमेंटल एवलांच राड-25

यहां हो रहे ट्रायल
जम्मू एंड कश्मीर
लेह
हिमाचल

सासे बना आईएसओ सर्टिफाइड
चंडीगढ़। स्नो एवलांच एंड स्टडी इस्टेबलिशमेंट (डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन का संगठन) को आईएसओ 9001-2008 सर्टिफिकेट मिल गया है। यह सर्टिफिकेट सासे को डायरेक्टोरेट ऑफ स्टैंडर्डाइजेशन, टेस्टिंग और क्वालिटी सर्टिफिकेशन ने प्रदान किया। सासे के निदेशक अश्वघोष गंजू को यह सर्टिफिकेट एसटीक्यूसी के महानिदेशक एनई प्रसाद ने दिया। इस मौके पर सर्टिफिकेशन सर्विसेज एसटीक्यूसी के सीईओ जीसी सक्सेना भी मौजूद रहे। सासे को रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए 2015 तक सर्टिफाइड किया गया है। सेक्टर-37 के हिम परिसर में आयोजित समारोह में सासे के निदेशक डा. अश्वघोष गंजू ने सासे की क्षमताओं और उनके महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि रिसर्च और डेवलपमेंट लैब के लिए अब क्यूएमएस सर्टिफिकेशन सबसे आवश्यक हो गया है। इस मौके पर डिप्टी डायरेक्टर जिमी कांसल ने सासे की उपलब्धियों का लेखा जोखा दिया। इस मौके पर एसोसिएट डायरेक्टर डा. एमआर भूटियानी ने कहा कि सासे की कोशिश है कि नई से नई रिसर्च करें जो कि देश के लिए जरूरी है।

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