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थीम प्रोजेक्ट की जांच दोबारा करने के आदेश

Chandigarh Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
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चंडीगढ़। थीम कम एम्यूजमेंट पार्क की करोड़ों रुपये की परियोजना में अनियमितता को लेकर सीबीआई से दोबारा जांच करने को कहा गया है। सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले में जांच एजेंसी की ओर से पेश क्लोजर रिपोर्ट को रिजेक्ट कर दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता विवेक अदित्य की अर्जी मंजूर कर ली है, जिसमें इस मामले में चंडीगढ़ के तत्कालीन प्रशासक जरनल एसएफ रोड्रिग्स की भूमिका की भी जांच करवाने, पूरे मामले की फिर से जांच करने और कुछ और धाराएं जोड़ने की अपील की गई थी। आदित्य ने फिल्म सिटी मामले की भी सीबीआई जांच फिर से कराने की मांग की थी। हालांकि इस मामले में सीबीआई की दलील थी कि जब जमीन ही अलाट नहीं हुई तो घोटाला कैसा। इस पर शिकायतकर्ता ने तर्क दिया कि प्रोजेक्ट रद्द होने से अपराध कम नहीं हो जाता। अदालत द्वार मंजूर की गई अर्जी में फिल्म सिटी की जांच भी फिर से कराने की मांग की गई थी।
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शिकायतकर्ता के तर्क
-सीबीआई ने इस मामले मुख्य पहलुओं की ही जांच नहीं की और उन्हें नजरंदाज किया।
- प्रोजेक्ट रद्द होने से अपराध कम नहीं होता।
- सीबीआई ने इस मामले में यूटी प्रशासन के तत्कालीन सलाहकार ललित शर्मा, पूर्व गृह सचिव कृष्ण मोहन और टूरिज्म डायरेक्टर विवेक अत्रे और ठेका लेने वाली कंपनी यूनिटेक के एमडी के खिलाफ कमजोर धाराएं 420, 201 और 120 बी (धोखाधड़ी, सुबूत मिटाना और षड्यंत्र) लगाई हैं, जबकि प्रशासन के अफसरों पर अतिरिक्त धारा 409, 511 (सरकारी संपत्ति का गबन और चुराना) लगाई जानी चाहिए।
-यूनिटेक के एमडी के खिलाफ धारा 107, 108, 109 के तहत केस दर्ज किया जाए।
- सीबीआई ने जांच के दौरान एक बार भी शिकायतकर्ता को बयान दर्ज करवाने के लिए नहीं बुलाया।
-एफआईआर के तथ्यों को अनदेखा किया गया, जिसमें टेंडर हासिल करने वाली कंपनी को गलत तरीके से करोड़ों का लाभ पहुचाने, जमीन की कीमत कम आंकने, इससे जुड़े दस्तावेज जानबूझ कर नष्ट करने की बात कही गई थी।
- जमीन कम रेट पर बोली लगाने वाले को अलाट की गई, जबकि रेवन्यू शेयरिंग मामले में डीएलएफ की ओर से इससे 13 गुना अधिक रेट दिए जाने की बात लिखी गई थी।
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विशेष अदालत का आदेश
सीबीआई के विशेष जज विमल कुमार ने बुधवार को शिकायतकर्ता का पक्ष सुनने के बाद थीम प्रोजेक्ट मामले की जांच फिर से करने का आदेश दिया। सीबीआई की ओर से गत 27 अप्रैल को इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दायर की गई थी। सीबीआई का कहना था कि उसे जांच में आरोपों के संबंध में साक्ष्य नहीं मिले हैं। शिकायतकर्ता विवेक आदित्य ने इस चुनौती देते हुए याचिका दायर की कि सीबीआई तथ्यों को अनदेखा कर रही है। इस पर बुधवार को विशेष अदालत ने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए जांच फिर से कर अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश करने को कहा।

क्या थी सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट
एमएस यूनिटेक को टेंडर जारी करने में यूटी प्रशासन के तत्कालीन सलाहकार ललित शर्मा, पूर्व गृह सचिव कृष्ण मोहन और टूरिज्म डायरेक्टर विवेक अत्रे ने किसी तरह की अनियमितता नहीं बरती। नियमों के तहत ही टेंडर जारी किया गया और शर्तें पूरी नहीं करने पर डीएलएफ को इस परियोजना के लिए अयोग्य करार दिया गया। इस दौरान अधिकारियों ने किसी बिल्डर से पक्षपात भी नहीं किया।

कोट्स
पूरे प्रोजेक्ट की सीबीआई ने सही तरीके से जांच नहीं की। अफसरों के दबाव में आकर सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट अदालत में जमा करवाई थी। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शिकायतकर्ता होने के बावजूद मुझे एक भी बार सीबीआई ने बयान दर्ज करवाने के लिए नहीं बुलाया।
-विवेक आदित्य

क्या था थीम पार्क प्रोजेक्ट
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए थीम कम एम्यूजमेंट पार्क सारंगपुर के पास 73.65 एकड़ जमीन पर बनना था। इसका निर्माण वर्ष 2007 में शुरू होना था। पहले चरण में इसमें 600-750 करोड़ का निवेश जबकि कुल 1000 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव था। इसमें वाटर पार्क, वाटर राफ्ट, हाई थ्रिल राइड्स और यूरो पूल बनाए जाने की योजना थी। इसका टेंडर मेसर्स यूनिटेक लिमिटेड को महज 5.5 करोड़ (फिक्सड एनुअल लाइसेंस फी) के अलावा 1.1 फीसदी वार्षिक रेवन्यू शेयरिंग पर अलॉट कर दिया गया। हालांकि इसके लिए एक अन्य कंपनी डीएलएफ की ओर से इसके लिए अधिक मूल्य चुकाने की बात कही गई थी।

शिकायत के बाद संघर्ष
-01 दिसंबर 2008 विवेक आदित्य ने थीम प्रोजेक्ट में घोटाले की शिकायत केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) से की।
- 18 दिसम्बर 2008 को सीवीसी ने शिकायतकर्ता की दलीलों को देखते हुए मामले की जांच शुरू की।
- 05 अक्तूबर 2009 को सीवीसी ने अपनी जांच के बाद सीबीआई को मामले की जांच करने के आदेश दिए।
-मई 2010 में सीबीआई केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू की।
-27 अप्रैल 2012 को सीबीआई ने प्रशासन के अफसराें को क्लीनचिट देते हुए अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दायर की।
- 28 मई 2012 को विवेक आदित्य ने क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती देते हुए याचिका दायर की।
-29 अगस्त को सुनवाई के बाद अदालत ने शिकायतकर्ता की अर्जी मंजूर करते हुए जांच दोबारा करने के आदेश दिए।

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