स्ट्रीट लाइट लगाने में घपले की वजह से इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 अंधेरे में डूबा

Chandigarh Updated Wed, 29 Aug 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 ढाई साल पहले लगाए गए सैकड़ों बिजली के पोल आज तक लाइटों का इंतजार कर रहे हैं। टेंडर लेने वाली कंपनी ने काम अधर में छोड़ने के बाद इनकी सुध तक नहीं ली। नगर निगम ने भी कंपनी पर कार्रवाई करने की बजाय उसे पोल की 90 प्रतिशत राशि दे दी। इसका नतीजा यह हुआ है कि प्रशासन को करोड़ों रुपये की कमाई देने वाला इंडस्ट्रियल एरिया रात को पूरी तरह अंधेरे में डूब जाता है, जिससे हादसों के साथ-साथ अपराधों का भी अंदेशा बना रहता है।
इंडस्ट्रियल एरिया फेज वन के ए, बी, सी और डी ब्लाक में 298 फैंसी स्ट्रीट लाइटें लगाने के लिए तीन टेंडर साल 2009 में अलग-अलग समय पर तीन कंपनियों को 1 करोड़ 83 लाख रुपये में अलाट किए गए। इन कंपनियों ने पोल तो लगा दिए, लेकिन लाइटें फिट नहीं की। टेंडर अलाटमेंट दस्तावेज के अनुसार 180 दिन में काम पूरा किया जाना था, लेकिन अब तक काम पूरा न करने के बावजूद नगर निगम ने ठेकेदारों को 90 प्रतिशत टेंडर की राशि जारी कर दी। लाइटें लगाने का प्रस्ताव साल 2007 में पास हुआ था। इसके बाद ब्लाक ए में 84 लाख, ब्लाक बी में 39 लाख और ब्लाक सी और डी में 60 लाख रुपये का टेंडर अलाट किया गया था।

कंपनियों को क्यों नहीं किया ब्लैकलिस्ट
डिप्टी मेयर सतीश कैंथ ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में लाइटें लगाने के मामले में घोटाला हुआ है। साल 2009-10 में पोल लगा दिए गए, लेकिन उसके बाद लाइटें नहीं लगी, फिर भी टेंडर राशि जारी कर दी गई। कंपनियों को तो ब्लैक लिस्ट किया जाना चाहिए था। बुधवार को होने वाली सदन की बैठक में अधिकारियों को इस पर जबाव देने के लिए कहा जाएगा।

लाइटों के रेट बढ़ने से खींचे हाथ
ब्लाक बी में लगने वाली लाइटों के टेंडर के अनुसार प्रति पोल के लिए 26 हजार रुपये तय किए गए हैं और उस पर लाइट लगाने के लिए 06 हजार 600 रुपये का खर्चा शामिल किया गया है। सूत्रों का कहना है कि संबंधित ठेकेदार इसलिए भी लाइटें लगाने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं क्योंकि रेट बढ़ने के कारण इतनी राशि से लाइटें नहीं लग सकती हैं। ऐेस में पोल की 90 प्रतिशत राशि लेकर वे चुपचाप बैठ गए हैं। ऐसे में लाखों रुपये के पोल बिना लाइटों के जंग खा रहे हैं।

शाम होते ही यहां आने से डरते हैं व्यापारी
व्यापार मंडल के सलाहकार एवं यहां पर मसालों का कारोबार करने वाले रवि प्रकाश कांसल ने कहा कि शाम होते ही इस एरिया में लोग आने से भी डरने लगते हैं। व्यापारियों को लाखों रुपये कैश लेकर जाना होता है, उनकी सुरक्षा भी रामभरोसे हैं। इसके अलावा रेलवे स्टेशन की ओर जाने के लिए भी यह अहम रास्ता है। एक बड़ा मॉल भी यहां पर है, इसलिए रात को भी लोगों का आना-जाना लगा रहता है। बाहरी एरिया की लाइटें भी खराब पड़ी हैं।

ठेकेदारों को 15 दिन का नोटिस
बिजली कमेटी के चेयरमैन अरुण सूद ने कहा कि लाइटें न लगने की जांच करवाई जाएगी। दोषी पाए जाने पर कंपनियों पर कार्रवाई होगी। बिजली विंग के कार्यकारी अभियंता एसपी सिंह का कहना है कि हाल ही में कंपनियों को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर लाइटें लगाने को कहा गया है।

पुराने उतरे हुए खंभे कहां!
पुराने खंभों को उतारकर नए लगाए गए थे, लेकिन टेंडर के अनुसार पुराने वाले खंभे सरकारी स्टोर में जमा करवाकर एनओसी लेनी थी। डिप्टी मेयर सतीश कैंथ का कहना है कि नियमों के अनुसार जब तक पुराना सामान जमा नहीं करवाया जाता, तब तक ठेकेदारों को राशि जारी नहीं हो सकती है।


वर्जन
औद्योगिक क्षेत्र में पोल लगने के बावजूद लाइटिंग का काम न होने की जानकारी नहीं है। समय सीमा के भीतर काम होना चाहिए था। बुधवार को पूरे मामले का पता करवाया जाएगा।
विवेक प्रताप सिंह, कमिश्नर, नगर निगम।

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