सर्जरी के लिए भी पूरी रोशनी नहीं पीजीआई में

Chandigarh Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। पीजीआई के ऑपरेशन थिएटर में होने वाली सर्जरी मरीजों की जान का जोखिम उठाकर की जा रही है। ऑपरेशन टेबल पर रोशनी का पर्याप्त इंतजाम ही नहीं है। ओटी लाइट्स के ज्यादातर बल्ब फ्यूज हैं। हालत यह है कि पीजीआई की न्यूरो ओटी में एक मरीज के ब्रेन की सर्जरी मात्र तीन बल्बों की रोशनी में करनी पड़ी। इस ओटी लाइट के पांच बल्ब फ्यूज थे। यह हाल सिर्फ न्यूरो की ओटी टेबल पर ही नहीं बल्कि यूरोलॉजी, जनरल सर्जरी, गाइनी, प्लास्टिक सर्जरी तथा आर्थोपेडिक सर्जरी की टेबल का भी है।
पीजीआई के सूत्रों के मुताबिक इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर में सात ओटी टेबल हैं। इनमें से सभी की प्रमुख लाइटों के आधे से ज्यादा बल्ब फ्यूज हैं। इमरजेंसी में पिछले आठ महीन से कम रोशनी में ही मरीजों की सर्जरी हो रही है। अमर उजाला के पास ऑपरेशन थिएटर की जो तस्वीरें हैं उससे साफ पता चलता है कि हालत कितनी गंभीर है। विशेषज्ञों का कहना है कि कम रोशनी में मरीजों की सर्जरी करना उसकी जान से खिलवाड़ करने के बराबर है।
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शिकायतें भी की लेकिन नहीं लगे बल्व
पीजीआई इमरजेंसी के ऑपरेशन थिएटर में ओटी के करीब आठ महीने से फ्यूज बल्वों को लेकर सर्जरी करने वाले डॉक्टरों ने कई बार पीजीआई के ऑपरेशन मैनेजमेंट कमेटी को लिखा गया लेकिन कुछ नहीं हुआ। इन्हें बदलने के लिए जनवरी में डॉक्टरों की ओर से ऑपरेशन मैनेजमेंट कमेटी को लिखा गया। कोई कार्रवाई नहीं होने पर मार्च में फिर रिमाइंडर भेजा गया। उसके बाद भी दो बार और कहा जा चुका है मगर अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया। इस ओटी में अक्सर सर्जरी करने वाले एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मरीज की जान बचाने के लिए सर्जरी जरूरी होती है इस रोका नहीं जा सकता, इसलिए कम रोशनी में भी डॉक्टर जोखिम उठा कर सर्जरी करते हैं। कम रोशनी में मानवीय भूल का खतरा बढ़ जाता है।
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चार सौ करोड़ बजट, बल्व के लिए दो हजार नहीं
पीजीआई को एक साल में प्लान और नान प्लान बजट के तौर पर तकरीबन चार सौ करोड़ रुपये मिलते हैं। इसके अलावा करोड़ों रुपये का फंड पीजीआई स्वयं भी जेनरेट करता है। बावजूद इसके पीजीअरई प्रशासन मरीजों के प्रति लापरवाही बरतते हुए दो हजार रुपये की कीमत वाले बल्व तक नहीं बदलवा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक एक बल्व की कीमत दो हजार से छह हजार रुपये के करीब है। पिछले आठ महीने से फ्यूज बल्व के सहारे ही मरीजों की जान जोखिम में डाल कर सर्जरी की जा रही है।
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किस टेबल पर कितने बल्ब फ्यूज
-न्यूरो सर्जरी के टेबल के पांच बल्ब फ्यूज हैं।
-यूरो सर्जरी टेबल पर चार बल्ब फ्यूज हैं।
-जनरल सर्जरी टेबल पर तीन बल्ब फ्यूज हैं।
-आर्थो टेबल पर पांच बल्ब फ्यूज हैं।
-गाइनी टेबल पर पर चार बल्ब फ्यूज हैं।
-प्लास्टिक सर्जरी में तीन बल्ब फ्यूज हैं।
(पीजीआई के इमरजेंसी ओटी में मेन ओटी टेबल के ऊपर आठ बल्बों वाली लाइटें लगी हैं। )
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सर्जरी के वक्त सभी लाइटें जलाना जरूरी
निश्चत रूप से सर्जरी के वक्त सभी लाइटें जलाई जाती हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है कि सर्जरी के वक्त कोई गलती न हो। ज्यादा रोशनी में मरीजों के काटे गए अंग को बारीकी से देखकर ऑपरेट किया जाता है। सरकार को अपना इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलप करना चाहिए ताकि मरीजों के लिए समस्याएं सामने न आएं।
डॉ. रमनीक सिंह बेदी,
प्रेसीडेंट, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन

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