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एक माह बाद भी नतीजा जीरो

Chandigarh Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
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चंडीगढ़। अनुपमा मामले की जांच करने में गठित कमेटी द्वारा कोई गंभीरता दिखाई नहीं जा रही है। कभी कोई सदस्य बाहर चला जाता है तो कभी कोई, कभी कानूनी पेंच का हवाला देकर जांच को ब्रेक लगा दिए जाते हैं। लगभग एक माह बाद भी पीजीआई प्रशासन और गठित जांच कमेटी किसी नतीजे पर पहुंच नहीं पाई है। इस मामले में अंदरूनी जांच कमेटी को पहले ही भंग किया जा चुका है और अब बाहरी कमेटी की जांच भी अधर में लटकी हुई है क्योंकि अब कमेटी की अगली बैठक ही तय नहीं है।
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अनुपमा मामले जांच कमेटी के इस रवैये को लेकर शहर के स्थानीय लोगों और अनुपमा के परिजनों में खासा रोष है। सेक्टर-15 के रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रेसीडेंट आरके शर्मा ने कहा कि पीजीआई की तो मंशा ही नहीं है कि वह जांच पूरी कराए। शर्मा ने कहा कि अगर ऐसा होता तो वह जांच कमेटी को एक तय समय में जांच को पूरा करने को कहते। चंडीगढ़ क्लब के पूर्व प्रेसीडेंट एवं पार्षद मुकेश बस्सी ने कहा कि अगर समय पर फैसला न हो तो देरी से होने वाले फैसले प्रभावित हो जाते हैं। सेक्टर-27 डी की रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की प्रेसीडेंट शिखा निझावन ने कहा कि अनुपमा के मामले में उसके परिजनों को हर हाल में जल्द न्याय मिलना चाहिए, जबकि उद्योगपति रूपिंदर सिंह ने कहा कि जांच कमेटी को टालमटोल का रवैया छोड़कर जल्द जांच पूरी करनी चाहिए। अनुपमा के पिता अमित सरकार का कहना है कि पीजीआई सच्चाई सामने नहीं लाना चाहती है, इसलिए जांच में गंभीरता नहीं दिखाई जा रही।

यह रहा कमेटी का हाल
17 जुलाई को छात्रा अनुपमा सेक्टर 18 में सीटीयू बस के नीचे आ गई थी।
24 जुलाई को पीजीआई में इलाज में लापरवाही के कारण उसकी मौत हो गई।
25 जुलाई को पीजीआई ने ऐसी जांच कमेटी बनाई, जिसके सदस्य ही शहर में मौजूद नहीं थे।
26 जुलाई को अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद कमेटी को बदला, लेकिन महज चार घंटे में जांच निपटाई।
28 जुलाई को इस कमेटी को भंग किया और प्रेस कांफ्रेंस में पीजीआई ने बाहरी सदस्यों से जांच कराने को कहा।
03 अगस्त को बनाई गई नई कमेटी, बाबा फरीदकोट मेडिकल यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. एसएस गिल को अध्यक्ष बनाया। इसमें एम्स के प्रो. एमसी मिश्र, जनरल अस्पताल-16 के डा. राजीव वढ़ेरा, पीजीआई के प्रो. वाईके बत्रा और डा. विपिन कौशल भी शामिल हैं।
04 अगस्त को प्रो. गिल अकेले ही पीजीआई का चक्कर लगाकर वापस चले गए, उस दिन कमेटी का कोई सदस्य आया ही नहीं।
10 अगस्त को कमेटी के सभी सदस्य पहुंचे और अनुपमा के परिजनों से मामले की जानकरी तो ली, लेकिन किसी भी डॉक्टर से पूछताछ नहीं की गई। 18 अगस्त को बैठक तो हुई, लेकिन कमेटी ने यह कहते हुए जांच को बंद करने को कहा कि अनुपमा के परिजन उपभोक्ता अदालत चले गए हैं। कमेटी ने पीजीआई से इस पर कानूनी राय मांगी और जांच रोक दी। पीजीआई ने जांच करने को कहा।
25 अगस्त को बैठक में प्रो. एमसी मिश्र विदेश में होने के कारण और डा. कौशल व्यक्तिगत कारणों के कारण नहीं आ पाए। अब इस कमेटी की बैठक कब होगी, इस बारे में कुछ तय नहीं है।

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