पीजीआई ओटी में गिरीं डेढ़ क्विंटल की लाइटें

Chandigarh Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
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चंडीगढ़। पीजीआई के ऑपरेशन थिएटर में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा टल गया। महिला मरीज को स्पाइनल सर्जरी के लिए एनेस्थीसिया देकर अचेत अवस्था में ऑपरेशन टेबल पर लिटाया गया तभी उसके ऊपर डेढ़ क्विंटल से ज्यादा वजन की ओटी लाइटें गिर गईं। यह तो शुक्र है कि जब लाइटें गिरी तो वहां मौजूद डॉक्टरों और स्टाफ ने उन लाइटों को जैसे तैसे पकड़ कर रोका और मरीज को टेबल सहित किनारे किया। लाइटें उस वक्त गिरी जब डॉक्टर उन्हें सेट कर रहे थे। पीजीआई में इतनी बड़ी लापरवाही तब सामने आई है जब इसी ऑपरेशन थिएटर का डेढ़ महीने पहले ही रेनोवेशन हुआ है। ओटी की लाइटें भी एक साल पहले ही लगाई गई थीं।
घटना शुक्रवार डेढ़ बजे पीजीआई के चौथी मंजिल पर बने आर्थोपेडिक विभाग के ऑपरेशन टेबल नंबर वन की है। 29 साल की कविता की स्पाइन की सर्जरी होनी थी। मरीज को दोपहर तकरीबन एक बजे आर्थो ओटी में सर्जरी के लिए ले जाया गया। सूत्रों के मुताबिक मरीज को ओटी टेबल पर एनेस्थीसिया देकर पूरी तरह से बेहोश कर दिया गया और इलाज करने वाले डॉ. सर्वदीप तथा डॉ. जोगिन्दर अपने अन्य रेजीडेंट के साथ मिलकर मरीज के ऊपर लगी ओटी की लाइटों को सेट करने लगे। इसी दौरान सीलिंग से लगीं ओटी लाइट के तीन बोल्ट टूट गए और ये नीचे गिरने लगीं। वहां मौजूद डॉक्टरों व अन्य स्टाफ ने मिलकर लाइटों को रोका और मरीज को नीचे से हटाया। इस घटना के चंद मिनट के बाद ही पूरे ओटी कांम्प्लेक्स में हंगामा मच गया। अन्य ओटी के लोग भी मदद को इस ऑपरेशन थिएटर में पहुंचे। इस घटना के बाद मरीज की सर्जरी टाल दी गई और ओटी को बंद कर दिया गया।

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रेनोवेशन के लिए जून में बंद था
जिस चौथी मंजिल के ऑपरेशन थिएटर में यह घटना हुई है उसको जून में एक महीने के लिए रेनोवेशन के नाम पर बंद किया गया था। इस दौरान इंजीनियरिंग विभाग ने पूरे कांम्प्लेक्स का रंगरोगन कर बिजली का वायरिंग तथा ओटी के टेबल के फाउंडेशन को जांचा था। रेनोवेशन के दौरान लाखों रुपये का खर्चा भी आया। सूत्रों का कहना है कि जो लाइट गिरी है उसको पिछले साल पचास लाख रुपये लगाकर खरीदा गया था। लेकिन इस साल रेनोवेशन में इस लाइट की ग्रिपिंग को नहीं जांचा गया।
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ट्रामा के ओटी बंद थे इसलिए लाए थे मेन ओटी में
ट्रामा सेंटर के सभी ओटी बंद होने की वजह से कविता को मेन ओटी में लाया गया था। एडवांस ट्रामा सेंटर में पिछले आठ महीने से आधे ओटी बंद पड़े हैं।
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इंजीनियरिंग विभाग से पूछा जाएगा
ओटी लाइटों की सपोर्ट के लिए लगे बोल्ट खुल गए थे। डॉक्टरों एवं अन्य लोगों की मदद से लाइटों को मरीज के ऊपर गिरने से बचा लिया गया। यह घटना बहुंत गंभीर है। इसलिए वह इसका मेंटीनेंस रखने वाले पीजीआई के इंजीनियािंग विभाग से शनिवार को इस बावत बात करेंगे।
प्रो. एसएन मथूरिया, चेयरमैन,
ओटी मैनेजमेंट कमेटी, पीजीआई
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अचानक हो गया हादसा
मरीज को बेहोश कर सर्जरी की तैयारी कर रहे थे तभी हादसा हो गया। लेकिन मरीज को तत्काल ही ओटी लाइटों के नीचे से हटा लिया गया। अब मरीज की बाद में सर्जरी होगी।
-डॉ. सर्वदीप सिंह

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